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इज्जत बचाने अदालत पहुंचे, 11 साल चला विवाद... SC ने फटकारा, 5-5 लाख जुर्माना भी लगाया

Advertisement सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की शिकायत लेकर अदालत पहुंचे सेलिब्रिटी वकीलों को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों ने खुद ही ऐसी स्थिति बनाई और बाद में उसी को लेकर अदालत पहुंच ग…

21 अगस्त 2026 को 09:56 am बजे
इज्जत बचाने अदालत पहुंचे, 11 साल चला विवाद... SC ने फटकारा, 5-5 लाख जुर्माना भी लगाया

सौजन्य से:- AajTak

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की शिकायत लेकर अदालत पहुंचे सेलिब्रिटी वकीलों को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों ने खुद ही ऐसी स्थिति बनाई और बाद में उसी को लेकर अदालत पहुंच गए. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.

यह मामला अभिनेत्री रोजलिन खान उर्फ रेहाना खान और सेलिब्रिटी वकील रिजवान सिद्दीकी से जुड़ा है. रोजलिन खान ने रिजवान सिद्दीकी के खिलाफ पेशेवर कदाचार की शिकायत की थी. आरोप था कि सिद्दीकी ने अपने क्लाइंट से जुड़ी गोपनीय जानकारी बिना अनुमति मीडिया के साथ साझा की और बिना सहमति के सार्वजनिक कानूनी नोटिस भी जारी किया.

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यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा JPSC-JSSC CGL परीक्षा विवाद, CID से जांच हटाकर CBI को सौंपने की मांग

इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एडवोकेट्स एक्ट के तहत रिजवान सिद्दीकी का लाइसेंस दो साल के लिए निलंबित कर दिया था. इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा और फिर सुप्रीम कोर्ट आया. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.

प्रतिष्ठा बचाने के लिए रिकॉर्ड छिपाए

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के रवैये पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि किसी मुकदमे में पक्षकारों को सच्चाई पता होती है, लेकिन इस मामले में दोनों ने जरूरी तथ्यों को पूरी तरह सामने नहीं रखा. कोर्ट के मुताबिक, अपनी खराब हुई प्रतिष्ठा बचाने के लिए दोनों पक्षों ने रिकॉर्ड की कुछ बातें छिपाईं.

कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष ऐसी गलती की शिकायत लेकर उसके पास आए, जो उन्होंने खुद की थी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस विवाद ने 11 साल तक सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और बार काउंसिल ऑफ इंडिया का समय लिया.

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यह भी पढ़ें: 10 साल की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तरुण तेजपाल, हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट के प्रकाशित फैसले से नाम हटाने की भी मांग

सुनवाई के दौरान एक पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से प्रकाशित फैसले में अपने नाम हटाने की मांग भी की. कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष पहले ही अपनी बातें सोशल मीडिया पर डाल चुके हैं और मीडिया को इंटरव्यू भी दे चुके हैं. ऐसे में अब फैसले से नाम हटाने की मांग नहीं मानी जा सकती.

आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों पर 5-5 लाख रुपये की लागत लगाई. कोर्ट का यह फैसला वकीलों के पेशेवर आचरण और क्लाइंट की गोपनीय जानकारी को लेकर अहम माना जा रहा है.

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