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पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज, 11 साल बाद फैसला सुनाया

कोर्ट ने उन अभ्यर्थियों की याचिकाएँ खारिद कर दीं जो 11 साल तक निष्क्रिय रहे और अब नियुक्ति पर सवाल उठा रहे थे। गृह विभाग की ओर से रोस्टर क्लियरेन्स की आवश्यकता न होने की सूचना और सरकार की यह बात कि 81 सिपाहियों को इस केस में पक्षकार नहीं बनाया गया था, को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने देरी को स्वीकृति मानते हुए राहत नहीं दी।

12 सितंबर 2026 को 06:05 am बजे
पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज, 11 साल बाद फैसला सुनाया

सौजन्य से:- ETV Bharat

'11 साल तक सोते रहे, अब जागे..' पटना हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति का मामला

पटना हाईकोर्ट ने बिहार में 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

Published : September 12, 2026 at 11:06 AM IST

पटना: पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुद्ध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि 11 साल तक आवेदक सोते रहे और अब दूसरे मामले में फैसला आने के बाद जगे हैं,तो ऐसे लोगों को राहत नहीं दी जा सकती. जस्टिस रितेश कुमार की एकलपीठ ने प्रदीप राम एंव अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इन्हें रद्द कर दिया.

क्या है पूरा मामला

2014 में 181 आर्मरर सिपाही पदों के लिए लिखित परीक्षा ली गई. जिसमें 213 अभ्यर्थी शामिल हुए. रोस्टर के तहत 132 का चयन हुआ और 81 रोस्टर क्लीयरेंस के कारण छूट गए. बिहार पुलिस मेन्स एसोसिएशन की आपत्ति पर डीजीपी ने गृह विभाग से मार्गदर्शन मांगा.

रोस्टर क्लीयरेंस की जरूरत नहीं - गृह विभाग

गृह विभाग ने पत्र संख्या 1550 जारी कर कहा कि ''यह सीधी नियुक्ति या प्रोन्नति नहीं है, इसलिए रोस्टर क्लीयरेंस की जरूरत नहीं हैं. जिसके बाद शेष 81 को भी नियुक्त कर वरीयता सूची जारी कर दी गई.''

क्या था आवेदक का तर्क

आवेदकों का कहना था कि हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में माना है कि ''आर्मरर चयन में रोस्टर लागू होगा और 231 अभ्यर्थियों का चयन रद्द कर दिया गया, तो उनके मामले में भी वही सिद्धांत लागू होगी.''

आयुद्ध सिपाही को केस में पक्षकार नहीं बनाया- सरकार

वही राज्य सरकार ने भी पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा था. बिहार सरकार की तरफ से कहा गया कि, ''मामले में 81 में से एक भी आयुद्ध सिपाही को इस केस में पक्षकार नहीं बनाया गया है, जिनकी इस केस के फैसला से नौकरी पर असर पड़ेगा.''

याचिका रद्द करने योग्य- पटना हाईकोर्ट

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ''विलंब, लैचेज और पक्षकार नहीं बनाये जाने के आधार पर याचिका रद्द करने योग्य है.'' कोर्ट ने यह भी कहा कि 11 वर्षो तक चुनौती नहीं देना, सहमति माना जाएगा

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