किसान पंचायत ने वनाधिकार कानून के सख्त कार्यान्वयन व मूल जनजातियों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की
नौगढ़ के तेंदुआ गाँव में आयोजित किसान पंचायत ने वनभूमि में बुलडोजर चलाने पर रोक, 75 साल से अधिक पुराने निवास को आधार मानकर वनाधिकार दावों का निस्तारण और कोल, पनिका, चेरो, मांझी आदि समुदायों को अनुसूचित जनजाति दर्जा देने की माँग रखी। इसके साथ ही दलित किसानों और महिलाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने, जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने, बिजली के निजीकरण और महंगाई नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी दबाव डाला गया।

सौजन्य से:- Hindustan
किसान पंचायत में वनाधिकार कानून लागू करने की मांग
नौगढ़ के तेंदुआ गांव में अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा आयोजित पंचायत ने वन भूमि के अधिकार और मूल निवासियों के उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की। वक्ताओं ने वनाधिकार कानून के प्रभावी कार्यान्वयन और 75 वर्ष से अधिक पुराने निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा की जरूरत पर बल दिया।
नौगढ़, हिन्दुस्तान संवाद। वन भूमि पर अधिकार और मूल निवासियों के उत्पीड़न पर रोक की मांग को लेकर रविवार को तेंदुआ गांव में अखिल भारतीय किसान सभा के तत्वावधान में किसान पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में वन क्षेत्र में पीढ़ियों से बसे लोगों के घरों और फसलों पर बुलडोजर चलाने पर रोक लगाने की मांग उठी। वक्ताओं ने कहा कि वनाधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और वन क्षेत्र में बसे मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा की जाए।किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष शंभूनाथ यादव ने कहा कि अन्य परंपरागत वन निवासियों से 75 वर्ष पुराने कागजात मांगना बंद किया जाए।
तीन पीढ़ी यानी 75 वर्ष के निवास को आधार मानकर वनाधिकार दावों का निस्तारण किया जाए। उन्होंने कोल, पनिका, चेरो, मांझी आदि समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की भी मांग की। वक्ताओं ने भरदुआ के दलित किसानों और महिलाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने, विजयपुर-बिजौरा से विस्थापित किसानों की जमीन पर नाम दर्ज करने और जबरिया भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा बिजली के निजीकरण पर रोक, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद करने, महंगाई पर नियंत्रण और किसानों को उपज का डेढ़ गुना दाम दिलाने की मांग भी उठाई गई। इसमें राजेंद्र यादव, महिला समिति की जिलाध्यक्ष लालमनी विश्वकर्मा, जिलामंत्री लालचंद सिंह एडवोकेट, परमानंद मौर्य, महानंद सत्यनारायण, रामनरेश, रामधनी, फेकू राम, रामेश्वर, बलिराम कुरील आदि रहे।
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