सुप्रीम कोर्ट में डीएमके की याचिका पर सुनवाई को तैयार, करूर भगदड़ मामले की जांच को प्रभावित करने का आरोप
तमिलनाडु के करूर में 41 लोगों की मौत से जुड़े हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर पहुंच गया है. विपक्षी पार्टी डीएमके ने मौजूदा टीवीके सरकार के मंत्रियों पर मामले को प्रभावित करने का आरोप लगाया है.

सौजन्य से:- ABP News
करूर भगदड़ मामले की जांच को प्रभावित करने से TVK नेताओं को रोकने की मांग, DMK की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
Karur Stampede Case: तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में DMK ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. याचिका में CM सी. जोसेफ विजय और मंत्रियों पर CBI जांच को प्रभावित करने और गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है.
तमिलनाडु के करूर में 41 लोगों की मौत से जुड़े हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर पहुंच गया है. विपक्षी पार्टी डीएमके ने मौजूदा टीवीके सरकार के मंत्रियों पर मामले को प्रभावित करने का आरोप लगाया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मंगलवार, 7 जुलाई को सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया है
डीएमके के संगठन सचिव आर एस भारती की याचिका वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में रखी. उन्होंने जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि टीवीके की रैली में मची भगदड़ के कुछ आरोपी पार्टी के सत्ता में आने के बाद मंत्री बन गए हैं. वह गवाहों को प्रभावित करने में लगे हैं.
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सुप्रीम कोर्ट हादसे की जांच CBI को सौंपी थी
अहमदी ने जजों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने ही हादसे की जांच CBI को सौंपी थी. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी को जांच की निगरानी के लिए नियुक्त किया था. सत्ता में आने के बाद तमिलगा वेत्तरी कड़गम (TVK) के मंत्री और नेता करूर भगदड़ मामले में 'धमकी भरे' और 'भ्रामक' सार्वजनिक बयान दे रहे हैं. याचिका में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और मंत्री आधव अर्जुना के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि टीवीके नेता इस त्रासदी के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को जिम्मेदार ठहराकर जनता को गुमराह कर रहे हैं और जारी सीबीआई जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.
करूर में कब मची थी भगदड़?
DMK ने इसे असाधारण स्थिति बताते हुए कहा है कि इस मामले में चार्जशीटेड व्यक्ति ही अब राज्य सरकार में उच्च पदों पर बैठ गए हैं. मुख्यमंत्री विजय 10 जुलाई को करूर का दौरा करने वाले हैं. वह पीड़ितों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए की अनुग्रह राशि और सरकारी नौकरियां सौंपेंगे. यह मह कल्याणकारी काम नहीं है. यह मुख्य गवाहों से सीधा संपर्क साध कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश है. ध्यान रहे कि 27 सितंबर 2025 को करूर में टीवीके की एक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी. इस गंभीर घटना की जांच मद्रास हाई कोर्ट ने विशेष जांच दल को सौंपी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी थी. जांच की निगरानी कोर्ट की एक कमिटी भी कर रही है.
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