सुप्रीम कोर्ट की पहल से लोन विवाद का समाधान
सुप्रीम कोर्ट की पहल पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने तिर्वा शाखा इंडियन बैंक के डेयरी लोन के विवाद का समाधान सुलह-समझौते के माध्यम से कर दिया। ऋण कर्ता ने बैंक प्रबंधक को टोकन मनी के रूप में चेक सौंप दिया और शेष राशि को 90 दिनों में जमा करने का वादा किया।

सौजन्य से:- Live Hindustan
सुप्रीम कोर्ट की अनोखी पहल से निपटा लोन का विवाद
इंडियन बैंक की शाखा तिर्वा में डेयरी लोन का मामला कई वर्षों से चल रहा था, जिसे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में दायर किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने सुलह-समझौते के माध्यम से समस्या का समाधान किया। ऋण कर्ता ने टोकन मनी चेक सौंप दी है और शेष राशि 90 दिन में जमा करने का वादा किया।
तिर्वा, संवाददाता। इंडियन बैंक की शाखा तिर्वा का एक डेयरी लोन का मामला कई वर्षों से चल रहा था। जिसको लेकर ऋण धारक ने उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में रिट दायर की थी। जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुलह-समझौते के आधार पर अनोखी पहल के चलते जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा वर्षों पुराना विवाद निपट गया है। जिसपर ऋण कर्ता ने टोकन मनी के रूप में बैंक प्रबंधक को विधिक न्यायालय में चेक सौंप दी। इंडियन बैंक की शाखा तिर्वा के प्रबंधक ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी शाखा से विमलेन्द्र सिंह वघेल द्वारा कामधेनु योजना के तहत बैंक से 39 लाख रूपए का डेयरी लोन लेकर डेयरी उद्योग स्थापित किया था।
कोरोना काल में खाता खराब हो जाने से बैंक द्वारा 25 लाख में एक मुस्त समाधान योजना के अंतर्गत सेटलमेन्ट किया गया था, लेकिन ऋण कर्ता ने 25 लाख के सापेक्ष 16 लाख 50 हजार रूपए ही जमा कर पाए थे। शेष पैसे की रिकवरी बंैक के नियमानुसार की जा रही थी। जिसको लेकर ऋण कर्ता ने उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में शेष जमा करने की अपील की थी। जिसपर सर्वोच्च न्यायालय ने रिकवरी को सरल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में सुलह-समझौते के आधार पर मामले को सुलटाने के निर्देश दिए थे। जिसपर विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायाधीश हरि प्रसाद, अपर जिला जज रजनीश मोहन वर्मा एवं सचिव अनुजा सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू कर दी थी। तीन दिवसों में चली सुनवाई में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में मामले को निस्तारित कर दिया। जिसपर सचिव की मौजूदगी में ऋण कर्ता ने प्रबंधक कप्तान सिंह को टोकन मनी की चेक सौंप दी। शेष पैसा को 90 दिनों में जमा करने का वादा किया है। उधर सचिव अनुजा सिंह ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की पहल पर मामला सुलह-समझौते के आधार पर निपटाया गया। मिडिसियन के अधिवक्ता अशोक राजपूत, कार्यालय के मुख्य लिपिक विनय मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।
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