11 साल पुराने कब्जा विवाद में अदालत का फैसला: कब्जा अवैध, मकान खाली करने का आदेश होगा लागू
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 11 वार्षिक भूमि और मकान कब्जा विवाद में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के 2015 के फैसले को सही ठहराया और कहा कि लाइसेंस समाप्त होने के बाद कब्जा अवैध था।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Sirmour News: अदालत
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11 साल पुराने कब्जा विवाद में अपील
खारिज, ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार
अदालत ने कहा- लाइसेंस समाप्त होने के बाद कब्जा अवैध, मकान खाली करने का आदेश रहेगा लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 11 वर्ष पुराने भूमि एवं मकान कब्जा विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए राजा राम की सिविल अपील खारिज कर दी। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के वर्ष 2015 के फैसले को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि लाइसेंस समाप्त होने के बाद संपत्ति पर कब्जा अवैध हो गया था। ऐसे में वादियों को कब्जा दिलाने का आदेश यथावत रहेगा।
मामले में वादियों का कहना था कि उनके पूर्वज ने वर्ष 1969 में भूमि खरीदकर उस पर मकान का निर्माण कराया था। वर्ष 1985 में पारिवारिक संबंधों के चलते राजा राम को मासिक 250 रुपये लाइसेंस शुल्क पर रहने की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि नवंबर 2009 के बाद उसने लाइसेंस शुल्क देना बंद कर दिया और कई बार कहने के बावजूद मकान खाली नहीं किया। इसके बाद वर्ष 2011 में कब्जा वापस लेने के लिए दीवानी वाद दायर किया गया। ट्रायल कोर्ट ने 17 अप्रैल 2015 में वादियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ दायर अपील में राजा राम ने बीमारी, अधिवक्ता की लापरवाही और धोखाधड़ी का हवाला दिया।
हालांकि अदालत ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद इन दलीलों को निराधार माना। अदालत ने निर्णय में कहा कि राजस्व अभिलेखों और गवाहों के बयानों से वादियों का स्वामित्व सिद्ध होता है, जबकि अपीलकर्ता केवल लाइसेंसधारी था। लाइसेंस निरस्त होने के बाद उसका कब्जा अवैध माना जाएगा। अदालत ने अपील को लागत सहित खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। इसके साथ ही अपीलकर्ता पर नवंबर 2009 से देय लाइसेंस शुल्क का भुगतान करने की जिम्मेदारी भी कायम रखी गई।-- -- --
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खारिज, ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार
अदालत ने कहा- लाइसेंस समाप्त होने के बाद कब्जा अवैध, मकान खाली करने का आदेश रहेगा लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 11 वर्ष पुराने भूमि एवं मकान कब्जा विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए राजा राम की सिविल अपील खारिज कर दी। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के वर्ष 2015 के फैसले को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि लाइसेंस समाप्त होने के बाद संपत्ति पर कब्जा अवैध हो गया था। ऐसे में वादियों को कब्जा दिलाने का आदेश यथावत रहेगा।
मामले में वादियों का कहना था कि उनके पूर्वज ने वर्ष 1969 में भूमि खरीदकर उस पर मकान का निर्माण कराया था। वर्ष 1985 में पारिवारिक संबंधों के चलते राजा राम को मासिक 250 रुपये लाइसेंस शुल्क पर रहने की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि नवंबर 2009 के बाद उसने लाइसेंस शुल्क देना बंद कर दिया और कई बार कहने के बावजूद मकान खाली नहीं किया। इसके बाद वर्ष 2011 में कब्जा वापस लेने के लिए दीवानी वाद दायर किया गया। ट्रायल कोर्ट ने 17 अप्रैल 2015 में वादियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ दायर अपील में राजा राम ने बीमारी, अधिवक्ता की लापरवाही और धोखाधड़ी का हवाला दिया।
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हालांकि अदालत ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद इन दलीलों को निराधार माना। अदालत ने निर्णय में कहा कि राजस्व अभिलेखों और गवाहों के बयानों से वादियों का स्वामित्व सिद्ध होता है, जबकि अपीलकर्ता केवल लाइसेंसधारी था। लाइसेंस निरस्त होने के बाद उसका कब्जा अवैध माना जाएगा। अदालत ने अपील को लागत सहित खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। इसके साथ ही अपीलकर्ता पर नवंबर 2009 से देय लाइसेंस शुल्क का भुगतान करने की जिम्मेदारी भी कायम रखी गई।
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