सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक निदेशकों के खिलाफ ईडी‑दिल्ली पुलिस को मामला विवरण देने का आदेश, विशेष अदालत की स्थापना का संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक लिमिटेड के निदेशकों के विरुद्ध दर्ज मामलों का विस्तृत विवरण ईडी और दिल्ली पुलिस से प्रस्तुत करने को कहा, ताकि 22,000 घर खरीदारों को असुविधा न हो और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित हो सके। न्यायालय ने इन मामलों की सुनवाई के लिये विशेष अदालत गठित करने और अगली सुनवाई 30 सितंबर को निर्धारित करने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- Jagran
यूनिटेक घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ईडी और दिल्ली पुलिस निदेशकों पर दर्ज मामलों का विवरण पेश करें
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ईडी और दिल्ली पुलिस को यूनिटेक लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ दर्ज मामलों का विवरण ...और पढ़ें
HighLights
- शीर्ष अदालत ने कहा-घर खरीदारों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए
- मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालत गठित करेंगे
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ईडी और दिल्ली पुलिस को यूनिटेक लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ दर्ज मामलों का विवरण पेश करने का निर्देश दिया ताकि इनकी त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जा सके। न्यायालय ने कहा कि घर खरीदारों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए, लेकिन आरोपितों को आगे कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए।
पीठ ने कहा- ' मुकदमे की सुनवाई शुरू होनी चाहिए और यह अनिश्चितकाल तक नहीं चलनी चाहिए। हम इन मामलों की विशेष रूप से सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत गठित करेंगे, लेकिन अब और देरी नहीं होनी चाहिए।' उसने मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को करना निर्धारित किया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल किया कि घर खरीदारों द्वारा जमा की गई राशि का क्या हुआ? पीठ ने कहा-' पैसा कहां गया? क्या इसे देश के बाहर भेज दिया गया? जांच एजेंसी की क्या भूमिका है? कानून स्पष्ट होना चाहिए। कानून को लेकर पैदा हुए भ्रम से आरोपितों को फायदा मिल रहा है। हमारे पास सक्षम एजेंसियां हैं, जो पता लगा सकती हैं कि पैसा कहां गया।'
शीर्ष अदालत को बताया गया कि यूनिटेक के निदेशकों के खिलाफ आपराधिक अभियोजन दो हिस्सों में है। एक तरफ ईडी कुछ मामलों की जांच कर रही है, वहीं आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 63 अलग-अलग मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए हैं।
न्यायालय ने पहले कहा था कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूनिटेक लिमिटेड के 22,000 घर खरीदारों को उनके सपनों का आशियाना मिले।
सरकार द्वारा नियुक्त नए बोर्ड ने इस रियल एस्टेट कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया है। पीठ ने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि वे रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करें।
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