पश्चिम बंगाल में 37 लाख मतदाता हटे, अपील पर फैसला 12 साल से अधिक का अनुमान, ईसीआई ने ट्रिब्यूनल बढ़ाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित अपीलीय ट्रिब्यूनलों को पश्चिम बंगाल में 37,05,235 हटाए गए मतदाता की अपील का निपटारा मौजूदा गति से 146 महीने, यानी लगभग 12 साल लग सकता है। इस देरी को घटाने के लिए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से ट्रिब्यूनलों की संख्या 24 से बढ़ाकर 42 करने तथा ज्यूडिशियल अधिकारियों को घर से काम करने की इजाज़त देने की गुजारिश की है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
West Bengal 37 Lakh Voters Removed From List Appeals May Take 12 Years For Decision Election Commission Makes Major Demand To Supreme Court
बंगाल में SIR से हटे 37 लाख वोटर, अपील पर फैसले में लग सकते हैं 12 साल; ECI ने सुप्रीम कोर्ट से की बड़ी मांग
Contributed by: Amit Anand Choudhary•Edited by: अभिषेक पाण्डेय|टाइम्स न्यूज नेटवर्क•
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पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की अपीलों के निपटारे में 12 साल से अधिक समय लगने का अनुमान है। चुनाव आयोग के अनुसार, 16 सितंबर तक 37,05,235 मामले लंबित थे। मौजूदा रफ्तार से निपटारे में 146 महीने लग सकते हैं।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ( SIR ) के बाद मतदाता सूची से हटाए गए अनगिनत वोटर शायद एक दशक तक वोट न दे पाएं। ऐसा इसलिए हो सकता है कि क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित की गई अपीलीय ट्रिब्यूनलों को उनके नाम दोबारा शामिल करने की अपील पर फैसला लेने में 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। यह अनुमान मौजूदा फैसलों की रफ्तार पर सामने आए हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में ट्रिब्यूनलों की संख्या को बढ़ाने की मांग की है।
चुनाव आयोग द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक, अप्रैल के बीच में काम शुरू होने के बाद से पिछले पांच महीनों में ट्रिब्यूनल ने 1,26,194 आवेदनों पर फैसला किया है। यानी शनिवार और रविवार समेत सभी दिन काम करने के बावजूद हर महीने औसतन करीब 25,238 मामलों का निपटारा हुआ है।
37 लाख से ज्यादा मामले लंबित
16 सितंबर को जब हलफनामा दायक किया गया था, तब ट्रिब्यूनलों के सामने 37,05,235 मामले लंबित थे। मौजूदा रफ्तार से, अगर ट्रिब्यूनल हफ्ते के सातों दिन काम करें, तो सभी मामलों पर फैसला लेने में 146 महीने लगेंगे।
चुनाव आयोग ने माना है कि 37 लाख मामलों के निपटारे का बहुत बड़ा काम करने के लिए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रिब्यूनल की संख्या काफी नहीं है। आयोग ने कोर्ट से गुजारिश की कि राज्य में ट्रिब्यूनल की संख्या 24 से बढ़ाकर 42 (मौजूदा संख्या से लगभग दोगुनी) कर दी जाए और ज्यूडिशियल अधिकारियों को घर से काम करने की इजाजत दी जाए।
लोकसभा सीटों के बराबर ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव
टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन की याचिका के जवाब में दाखिल हलफनामे में कहा गया, 'लंबित अपीलों के निपटारे को और बेहतर और तेज बनाने के मकसद से, यह प्रस्ताव है कि पश्चिम बंगाल राज्य में अपीलेट ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाए ताकि यह राज्य में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या के बराबर हो सके और लंबित अपीलों का तेजी से निपटारा हो सके।' इसमें कहा गया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों को घर से सुनवाई करने और अन्य कार्यवाही करने की इजाजत देने से 'आने-जाने में लगने वाले समय को कम करके लंबित अपीलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिलेगी।'
ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली SOP के तहत
ट्रिब्यूनल के कामकाज को लेकर दायर एक याचिका के जवाब में आयोग ने एक और हलफनामा दाखिल किया। इसमें कहा गया कि ट्रिब्यूनल का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर किया गया था। इनके कामकाज के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) उस कमेटी ने तैयार किया है जिसे इसी मकसद से बनाया गया था। इस कमेटी में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज भी शामिल थे।
आयोग ने कहा कि ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली, प्रक्रिया और लोगों की पहुंच से जुड़े मुद्दे SOP और संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इनसे जुड़ी व्यवहारिकता, तौर-तरीके और क्रियान्वयन पर फैसला संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाना उचित होगा।
लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।
विशेषज्ञता
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पत्रकारिता अनुभव
रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा 'राशन चोरी' का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।
शिक्षा/पुरस्कार
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