SC संशोधन बिल: क्या है इस विधेयक का मकसद? लोकसभा ने हंगामे के बीच पास किया
सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़ाने, पेंडिंग मामलों को कम करने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के मकसद से लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की) संशोधन विधेयक, 2026 को हंगामे के बीच पास किया है।

सौजन्य से:- livehindustan.com
क्या है SC संशोधन बिल? हंगामे के बीच लोकसभा में हुआ पास; 2 अन्य बिल भी पेश
सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 का मकसद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़ाना, पेंडिंग मामलों को कम करना और तेजी से न्याय सुनिश्चित करना है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही बाधित रही और दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजकर 10 मिनट पर ही बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष के हंगामे के बीच ही सदन ने SC संशोधन बिल यानी सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश समेत न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रावधान वाला विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिया।
सरकार ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 और बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 भी पेश किए। बैठक शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता का उल्लेख किया और उन्हें बधाई दी। इसके बाद जब उन्होंने प्रश्नकाल शुरू कराया तो विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे। बिरला ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह करते हुए कहा, ''मुझे लगता है कि आप नियोजित तरीके से सदन नहीं चलाना चाहते। प्रश्नकाल महत्वपूर्ण होता है। कृपया प्रश्नकाल चलने दें।''
दो अन्य बिल भी पेश
शोर-शराबा जारी रहने पर अध्यक्ष ने बैठक दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। इसी दरम्यान विपक्ष के हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 पेश किए। सदन में हंगामा नहीं थमने पर पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कुछ मिनट बाद ही कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
SC संशोधन बिल में क्या प्रावधान?
सदन की बैठक जब अपराह्न दो बजे शुरू हुई तो कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। इसमें उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश समेत न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रावधान है। इस दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सदस्य राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे थे। बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 का मकसद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़ाना, पेंडिंग मामलों को कम करना और तेजी से न्याय सुनिश्चित करना है।
11वें दिन भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं
पीठासीन सभापति तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने का आग्रह करते हुए उनसे विधेयक पर चर्चा में भाग लेने को कहा, लेकिन सदन में हंगामा नहीं थमा। सदन ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही ध्वनिमत से बिना चर्चा के विधेयक को पारित कर दिया। इसके बाद हंगामा नहीं थमने पर तेन्नेटी ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और तब से सदन में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे की स्थिति के कारण आज लगातार 11वें दिन भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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