सुप्रीम कोर्ट में फर्जी दवा मामलों की तेज जांच‑ट्रायल के लिए जनहित याचिका दायर
वकील अश्विनी उपाध्याय ने नकली दवाओं, वैक्सीन और सिरप के निर्माण‑बिक्री पर रोक के लिये जनहित याचिका दाखिल की, जिसमें केंद्र‑राज्य सरकारों से तीन महीने में जांच और एक साल में मुकदमे समाप्त करने का निर्देश मांगा गया है। याचिका में SOP, डिजिटल रिकॉर्डिंग, फॉरेंसिक जांच तथा ग्रेडेड सज़ा नीति जैसी कड़ी कार्रवाई की भी मांग की गई है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
नकली और मिलावटी दवाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर देशभर में एक समान सख्त व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
नई दिल्ली: नकली और मिलावटी दवाओं, वैक्सीन और कफ सिरप के निर्माण व बिक्री पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र और राज्यों को फर्जी दवाओं से जुड़े मामलों की जांच तीन महीने में पूरी करने और ट्रायल एक साल के भीतर पूरा करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिका में की गई ये मांग
साथ ही ऐसे मामलों की जांच के लिए देशभर में एक समान प्रक्रिया और सख्त सजा का प्रावधान करने की मांग की गई है। वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से मंगलवार को दाखिल PIL में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानून एवं न्याय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों के अलावा सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और विधि आयोग को पक्षकार बनाया गया है।
केंद्र और राज्य सरकारों से की गई ये मांग
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को नकली दवाओं से जुड़े मामलों की जांच तीन महीने में पूरी करने तथा मुकदमों की सुनवाई एक साल के भीतर समाप्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा तलाशी, जब्ती और दवाओं के नमूने लेने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने और जब्त दवाओं की फॉरेंसिक जांच समयबद्ध तरीके से कराने की मांग की गई है।
पूरी प्रक्रिया की होनी चाहिए पूरी वीडियोग्राफी
याचिका में कहा गया है कि तलाशी, जब्ती, सैंपलिंग और जब्त सामान की सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी होनी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि देश में Drugs and Cosmetics Act, 1940 लागू होने के बावजूद नकली दवाओं, इंजेक्शन, वैक्सीन और सिरप के निर्माण तथा बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, ऐसे मामलों में न तो जांच की कोई समान प्रक्रिया है, न समयबद्ध ट्रायल और सजा की प्रभावी व्यवस्था।
PIL में कही गई ये बात
PIL में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था में मौजूद खामियों के कारण संगठित नकली दवा नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रही है। याचिका में फर्जी दवा मामलों में वित्तीय जांच के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की जरूरत भी बताई गई है।
पॉलिसी तैयार करने का निर्देश देने की मांग
याचिका में केंद्र को नकली दवाओं के निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए ग्रेडेड सेंटेंसिंग पॉलिसी तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि अपराध की गंभीरता के अनुरूप कड़ी और प्रभावी सजा सुनिश्चित हो सके।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें
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