होमअपराधसुप्रीम कोर्ट में फर्जी दवा मामलों की तेज जांच‑ट्रायल के लिए जनहित याचिका दायर
अपराध

सुप्रीम कोर्ट में फर्जी दवा मामलों की तेज जांच‑ट्रायल के लिए जनहित याचिका दायर

वकील अश्विनी उपाध्याय ने नकली दवाओं, वैक्सीन और सिरप के निर्माण‑बिक्री पर रोक के लिये जनहित याचिका दाखिल की, जिसमें केंद्र‑राज्य सरकारों से तीन महीने में जांच और एक साल में मुकदमे समाप्त करने का निर्देश मांगा गया है। याचिका में SOP, डिजिटल रिकॉर्डिंग, फॉरेंसिक जांच तथा ग्रेडेड सज़ा नीति जैसी कड़ी कार्रवाई की भी मांग की गई है।

17 सितंबर 2026 को 12:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट में फर्जी दवा मामलों की तेज जांच‑ट्रायल के लिए जनहित याचिका दायर

सौजन्य से:- Navbharat Times

नकली और मिलावटी दवाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर देशभर में एक समान सख्त व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

नई दिल्ली: नकली और मिलावटी दवाओं, वैक्सीन और कफ सिरप के निर्माण व बिक्री पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र और राज्यों को फर्जी दवाओं से जुड़े मामलों की जांच तीन महीने में पूरी करने और ट्रायल एक साल के भीतर पूरा करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका में की गई ये मांग

साथ ही ऐसे मामलों की जांच के लिए देशभर में एक समान प्रक्रिया और सख्त सजा का प्रावधान करने की मांग की गई है। वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से मंगलवार को दाखिल PIL में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानून एवं न्याय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों के अलावा सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और विधि आयोग को पक्षकार बनाया गया है।

केंद्र और राज्य सरकारों से की गई ये मांग

याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को नकली दवाओं से जुड़े मामलों की जांच तीन महीने में पूरी करने तथा मुकदमों की सुनवाई एक साल के भीतर समाप्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा तलाशी, जब्ती और दवाओं के नमूने लेने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने और जब्त दवाओं की फॉरेंसिक जांच समयबद्ध तरीके से कराने की मांग की गई है।

पूरी प्रक्रिया की होनी चाहिए पूरी वीडियोग्राफी

याचिका में कहा गया है कि तलाशी, जब्ती, सैंपलिंग और जब्त सामान की सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी होनी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि देश में Drugs and Cosmetics Act, 1940 लागू होने के बावजूद नकली दवाओं, इंजेक्शन, वैक्सीन और सिरप के निर्माण तथा बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, ऐसे मामलों में न तो जांच की कोई समान प्रक्रिया है, न समयबद्ध ट्रायल और सजा की प्रभावी व्यवस्था।

PIL में कही गई ये बात

PIL में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था में मौजूद खामियों के कारण संगठित नकली दवा नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रही है। याचिका में फर्जी दवा मामलों में वित्तीय जांच के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की जरूरत भी बताई गई है।

पॉलिसी तैयार करने का निर्देश देने की मांग

याचिका में केंद्र को नकली दवाओं के निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए ग्रेडेड सेंटेंसिंग पॉलिसी तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि अपराध की गंभीरता के अनुरूप कड़ी और प्रभावी सजा सुनिश्चित हो सके।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Legalकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
राजनीतिक सत्ता पर व्यंग्य की पाबंदी: भारत में हास्य, अभिव्यक्ति और संविधान का संघर्ष
अपराध

राजनीतिक सत्ता पर व्यंग्य की पाबंदी: भारत में हास्य, अभिव्यक्ति और संविधान का संघर्ष

आलमाबाद उच्च न्यायालय ने आयुष मलिक को स्वतंत्रता दी: धर्म परिवर्तन पर पिता के दमन को नकारा
अपराध

आलमाबाद उच्च न्यायालय ने आयुष मलिक को स्वतंत्रता दी: धर्म परिवर्तन पर पिता के दमन को नकारा

कॉमेडियन प्राणित मोरे ने '370 रुपये की बिरयानी' विवाद से जुड़े FIR को मिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
अपराध

कॉमेडियन प्राणित मोरे ने '370 रुपये की बिरयानी' विवाद से जुड़े FIR को मिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: आयकर सेटलमेंट आयोग के आदेश के बाद अस्सेसिंग ऑफिसर नहीं कर सकता पुनर्मूल्यांकन
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: आयकर सेटलमेंट आयोग के आदेश के बाद अस्सेसिंग ऑफिसर नहीं कर सकता पुनर्मूल्यांकन

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व रक्षा मंत्रालय की आलोचना की, विकलांग सैनिकों को लाभ न मिलने की बात को उजागर किया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व रक्षा मंत्रालय की आलोचना की, विकलांग सैनिकों को लाभ न मिलने की बात को उजागर किया

हाईकोर्ट ने आरपीएफ जवानों की जमानत खारिज, हिरासत में मौत के मामलों पर चेतावनी दी
अपराध

हाईकोर्ट ने आरपीएफ जवानों की जमानत खारिज, हिरासत में मौत के मामलों पर चेतावनी दी

कॉर्पोरेट संस्था पर भी Mens Rea आधारित दलील, सुप्रीम कोर्ट ने Sanofi India केस में दिया फैसला
अपराध

कॉर्पोरेट संस्था पर भी Mens Rea आधारित दलील, सुप्रीम कोर्ट ने Sanofi India केस में दिया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि अपवाद मामलों का निर्णय केवल मध्यस्थीय त्रैब्यूनल का अधिकार है
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि अपवाद मामलों का निर्णय केवल मध्यस्थीय त्रैब्यूनल का अधिकार है

ताज़ा ख़बरें