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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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स्थायी लोक अदालत ने अधिशासी अभियंता को तलब किया:मऊ में उपभोक्ता को अदेय प्रमाण-पत्र न देने पर मांगा स्पष्टीकरण
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मऊ जिले में स्थायी लोक अदालत ने एक उपभोक्ता को विद्युत बिल भुगतान के बाद भी 'अदेय प्रमाण-पत्र' (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) न देने के मामले में अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम को तलब किया है। बुधवार को अदालत ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।
न्यायपीठ अध्यक्ष हीरा लाल और सदस्य विकास भाई निकुम्भ व अभिषेक गौरव ने आदेश में कहा यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, तो दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर उपभोक्ता को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान के लिए प्रतिदिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया जाएगा।
यह मामला विरेश यादव बनाम अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम के बीच का है। याची विरेश यादव ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उन्होंने बकाया विद्युत बिल की 32,692 रुपये की राशि का भुगतान कर दिया है। इसके बावजूद उनका कनेक्शन न तो काटा जा रहा है और न ही उन्हें अदेय प्रमाण-पत्र दिया जा रहा है।
उन्हें महीनों से परेशान किया जा रहा है।पत्रावली का अवलोकन करने के बाद स्थायी लोक अदालत ने पाया कि अधिशासी अभियंता आशीष कुमार सेठ के हस्ताक्षर से जारी पत्रांक संख्या 1416/वि.वि. खंड प्रथम दिनांक 08 मई में वाद संख्या 38/2024 के तहत विद्युत बिल की राशि 32,692 रुपये बताई गई थी। याची ने यह राशि 26 मई को जमा कर दी थी, जिसकी रसीद भी पत्रावली में शामिल है।
अदालत ने कहा कि विद्युत बिल की जमा रसीद और याची का प्रार्थना पत्र इस आशय से प्रेषित किया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी 06 जुलाई तक आवश्यक कार्यवाही पूरी करते हुए रसीद और अदेय प्रमाण-पत्र याची को उपलब्ध कराएं। अन्यथा, उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्ट करना होगा कि सहमति के बावजूद और धनराशि जमा होने के बाद भी विभाग द्वारा याची को अदेय प्रमाण-पत्र क्यों नहीं दिया गया।
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