सत्र न्यायालय ने सोनिया गांधी के मतदाता सूची विवाद में मजिस्ट्रेट के फैसले को निरस्त किया
दिल्ली के सत्र न्यायालय ने सोनिया गांधी के नाम को वोटर लिस्ट में शामिल होने से जुड़ी शिकायत में मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया आदेश रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि आदेश में कारण स्पष्ट नहीं थे और प्रक्रिया के अनुसार पुलिस की रिपोर्ट और प्राथमिकी पर विचार नहीं किया गया। मामला अब मजिस्ट्रेट के पास लौटाया गया है और नई सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है।

सौजन्य से:- Hindustan
सोनिया गांधी को झटका, सेशन कोर्ट ने वोटर लिस्ट विवाद में निचली अदालत का आदेश रद्द किया
अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ठोस कारण नहीं बताया गया, इससे पता चलता है कि मामले पर ठीक से विचार नहीं किया गया। प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने के बजाय, मजिस्ट्रेट का आदेश नागरिकता के मुद्दे की ओर मुड़ गया।
दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल होने से जुड़े मामले में मजिस्ट्रेट का पुराना आदेश रद्द कर दिया है। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से करीब तीन साल पहले ही वोटर लिस्ट में दर्ज कर दिया गया था। इसे लेकर वकील विकास त्रिपाठी ने शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने 11 सितंबर 2025 को इस शिकायत पर जांच से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ त्रिपाठी ने अदालत में याचिका दायर की थी।
स्पेशल जज विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट के आदेश को सही प्रक्रिया के तहत नहीं दिया गया आदेश बताया। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट को पहले पुलिस अधिकारी की बात सुननी चाहिए थी और संबंधित थाने से मामले की स्थिति की रिपोर्ट भी मांगनी चाहिए थी। अदालत के मुताबिक, ऐसा नहीं किया गया। साथ ही मजिस्ट्रेट ने यह भी साफ नहीं किया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाना चाहिए था या मामले में कानून के तहत कोई दूसरी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
अदालत ने किस बात पर जताई आपत्ति
अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध के होने या न होने के मूल सवाल पर विचार नहीं किया। इसके बजाय, नागरिकता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर दिया गया। न्यायाधीश ने कहा कि जांच के स्तर पर मुख्य सवाल यह होना चाहिए था कि शिकायत में ऐसे तथ्य सामने आते हैं या नहीं, जिनसे संज्ञेय अपराध का पता चलता है। अदालत के मुताबिक, इस पहलू पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया। इसी आधार पर पहले दिए गए आदेश को कानूनी रूप से गलत माना गया।
शिकायत पर नए सिरे से होगी सुनवाई
अदालत ने मामले को वापस मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया। साथ ही, यह निर्देश दिया कि शिकायत पर नए सिरे से दलीलें सुनी जाएं और उसके बाद कानून के मुताबिक कारण सहित आदेश पारित किया जाए। मामले में अब आगे की सुनवाई 29 सितंबर को होगी। हालांकि, अदालत के इस आदेश से आरोप साबित नहीं हुए हैं और न ही सोनिया गांधी के खिलाफ किसी अपराध का निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने फिलहाल केवल मजिस्ट्रेट के पहले आदेश को रद्द कर शिकायत पर कानून के अनुसार दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।
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