सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चढ़ावा चोरी केस की चार्जशीट दो दिन में दाखिल होगी
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के चार याचिकाओं पर सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पहली गिरफ्तारी के 90‑दिन का समय 25 सितंबर को समाप्त हो रहा है और दो दिनों में चार्जशीट दायर की जाएगी, नहीं तो डिफॉल्ट जमानत दी जाएगी। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट में सीसीटीवी एवं अन्य सामग्री के बारीकी से विश्लेषण को स्वीकार किया और कहा कि जांच काफी हद तक पूरी है, जिससे चार्जशीट फाइल होने की संभावना है।

सौजन्य से:- AajTak
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अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की स्वतंत्र जांच की मांग वाली 4 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट को बताया कि इस मामले में दो दिनों में चार्जशीट दाखिल हो जाएगी, क्योंकि मामले में पहली गिरफ्तारी को 90 दिन 25 सितंबर को पूरे हो रहे हैं. साथ ही एसजी ने कोर्ट को बताया कि स्टेटस रिपोर्ट रजिस्ट्री में भेज दी गई है.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी के 90 दिन 25 सितंबर को पूरे रहे है. दो दिनों में चार्जशीट दाखिल हो जाएगी, अगर ऐसा नहीं हुआ तो आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिल जाएगी. इस पर सीजेआई ने कहा कि आपको बिल्कुल चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए.
'बारीकी से हो रहा है एनालिसिस'
स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपियों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य मटीरियल का बारीकी से एनालिसिस किया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में रिकॉर्ड किया.
स्टेटस रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि चढ़ावे के कीमती सामान की रसीद एक खास सॉफ्टवेयर से बनाई जाती है और उन सभी सामानों को एसबीआई (SBI) के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है.
'पूरी हो चुकी है जांच'
वहीं, UP सरकार की तरफ से बताया गया कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है. जांच पूरी होने पर संबंधित कोर्ट में चार्जशीट फाइल की जाएगी. SIT का कहना है कि जांच अब तक पूरी हो चुकी है. SIT 25 सितंबर को या उससे पहले चार्जशीट फाइल करेगी.
हाथ में नहीं लेंगे मामला: CJI
सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार सही आदेश पारित करने की पूरी अनुमति दे दी है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि वह सेशन जज से मामला अपने हाथ में नहीं लेना चाहते. उन्होंने टिप्पणी की कि अगर अदालत को आगे जांच की जरूरत महसूस होगी, तभी वह इस संबंध में कोई नया ऑर्डर पास करेंगे.
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