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कानून में निर्धारित तरीके से ही शपथ मान्य : हाईकोर्ट

कानून में निर्धारित तरीके से ही शपथ मान्य : हाईकोर्ट केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि निर्वाचित स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को कानून के अनुसार ही शपथ लेनी होगी। तिरुवनंतपुरम नगर निगम के भाजपा पार्षदों द्वारा देवी-देवताओं के न…

24 जून 2026 को 06:53 pm बजे
कानून में निर्धारित तरीके से ही शपथ मान्य :  हाईकोर्ट

सौजन्य से:- Live Hindustan

कानून में निर्धारित तरीके से ही शपथ मान्य : हाईकोर्ट

केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि निर्वाचित स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को कानून के अनुसार ही शपथ लेनी होगी। तिरुवनंतपुरम नगर निगम के भाजपा पार्षदों द्वारा देवी-देवताओं के नाम पर ली गई शपथ को अमान्य करार दिया गया। अदालत ने निर्धारित शपथ प्रारूप में बदलाव को अस्वीकार किया और नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की पहचान दी।

कोच्चि, एजेंसी। केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि निर्वाचित स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को कानून में निर्धारित तरीके से ही शपथ लेनी होगी। अदालत ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के भाजपा के कई पार्षदों द्वारा ली गई उन शपथों को अमान्य करार दिया, जिनमें उन्होंने ‘ईश्वर’ या ‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’ के बजाय अन्य नामों का उल्लेख किया था। न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि केरल नगर पालिका अधिनियम और केरल पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्वाचित सदस्यों को शपथ या तो ‘ईश्वर के नाम पर’ या ‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’ के साथ लेनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि शपथ लेते समय किसी विशेष देवी-देवता, भारत माता, किसी राजनीतिक आंदोलन के शहीदों, संगठन या व्यक्ति का नाम शामिल करने की अनुमति इन कानूनों में नहीं है।यह

मामला तब सामने आया, जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों ने विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं, भारतंबा, भारत माता, गुरुदेव और राजनीतिक आंदोलन के शहीदों के नाम पर शपथ ली थी। अदालत ने कहा कि शपथ लेना मतदाताओं के प्रति एक गंभीर वचन है कि निर्वाचित प्रतिनिधि संविधान का सम्मान करेगा, कानून के शासन का पालन करेगा और ईमानदारी से जनता की सेवा करेगा। इसलिए शपथ ठीक उसी रूप में दिलाई जानी चाहिए, जैसा कानून में निर्धारित है। न्यायमूर्ति कुन्हीकृष्णन ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को किसी भी देवी-देवता की पूजा करने या किसी भी धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन कानून में निर्धारित शपथ के प्रारूप में किसी प्रकार का जोड़ या बदलाव स्वीकार्य नहीं है।

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