उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा अनधिकृत कब्ज़ा करने वालों को नहीं हटा सकता बिना कानूनी मंज़ूरी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि गैर-कानूनी कब्ज़ा करने वालों को कानूनी मंज़ूरी के बिना सामान्य प्रशासनिक नोटिस के ज़रिए नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानूनी मंज़ूरी के बिना किसी संपत्ति से ज़बरदस्ती बेदखल करना संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
रेलवे कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सामान्य नोटिस से अनधिकृत कब्ज़ा करने वालों को नहीं हटा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
Shahadat
24 Jun 2026 6:52 PM IST
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे की ज़मीन पर गैर-कानूनी कब्ज़ा करने वाले व्यक्ति को भी कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सामान्य प्रशासनिक नोटिस के ज़रिए नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानूनी मंज़ूरी के बिना किसी संपत्ति से ज़बरदस्ती बेदखल करना संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है, और बेदखली केवल कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन करके ही की जा सकती है।
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क्स), नॉर्दर्न रेलवे, देहरादून द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं ने मसूरी के झारीपानी में स्थित संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा किया। विवादित नोटिस में रेलवे की ज़मीन पर कथित तौर पर कब्ज़ा करने वाले लोगों को ज़मीन खाली करने का निर्देश दिया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नोटिस उनके घरों पर लगाया गया और इससे ज़बरदस्ती बेदखल किए जाने का तत्काल खतरा पैदा हो गया।
कोर्ट ने कहा कि कानूनी मंज़ूरी के बिना किसी व्यक्ति को अचल संपत्ति से बेदखल करना संवैधानिक और मानवाधिकारों, दोनों का उल्लंघन है।
कोर्ट ने दोहराया कि स्थापित कब्ज़े (settled possession) को - भले ही वह गैर-कानूनी कब्ज़ा हो - असली मालिक द्वारा कानून को अपने हाथ में लेकर ज़बरदस्ती नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि स्थापित कब्ज़े से बेदखली केवल अदालत के ज़रिए ही की जा सकती है और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन तभी माना जाता है, जब सक्षम अदालत द्वारा पक्षों के अधिकारों का फैसला किया जाए।
कोर्ट ने कहा,
"कानूनी मंज़ूरी के बिना किसी व्यक्ति को अचल संपत्ति से ज़बरदस्ती बेदखल करना संवैधानिक और मानवाधिकारों, दोनों का उल्लंघन है। कानून यह अनिवार्य करता है कि स्थापित कब्ज़े वाले किसी घुसपैठिए या किराएदार को भी ज़बरदस्ती नहीं हटाया जा सकता; ज़मीन के मालिक को सक्षम अदालत से आदेश प्राप्त करना होगा और स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।"
कोर्ट ने पाया कि विवादित नोटिस किसी कानून के तहत जारी नहीं किया गया और दोहराया कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना गैर-कानूनी कब्ज़ा करने वाले व्यक्ति को भी संपत्ति से नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को तीस दिनों के भीतर ज़मीन खाली करने का निर्देश देने वाला प्रशासनिक नोटिस कानून की नज़र में मान्य नहीं हो सकता।
इसके अनुसार, कोर्ट ने 05.10.2023 के नोटिस को याचिकाकर्ताओं के संबंध में रद्द किया। साथ ही यह स्पष्ट किया कि रेलवे गैर-कानूनी कब्ज़े में पाए गए लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कदम उठाने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
Case No.: Ajay Kumar v. The Northern Railways [WPMS/2992/2023]
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