होममुकदमेसुप्रीम कोर्ट की गोलियां खाने की टिप्पणी पर अभिजीत दीपके ने लगाया चुटकुला, पूछा सवाल
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट की गोलियां खाने की टिप्पणी पर अभिजीत दीपके ने लगाया चुटकुला, पूछा सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जज विपक्षी नेताओं के खिलाफ ऐसे बयान देते हैं तो आम आदमी के लिए क्या उम्मीद बचती है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट अब सबको गोलियां खाने के लिए मजबूर करना चाहता है?

8 अगस्त 2026 को 06:15 am बजे
सुप्रीम कोर्ट की गोलियां खाने की टिप्पणी पर अभिजीत दीपके ने लगाया चुटकुला, पूछा सवाल

सौजन्य से:- livehindustan.com

क्या सुप्रीम कोर्ट चाहती है कि सब गोलियां खाएंः अभिजीत दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट अब सबको गोलियां खाने के लिए मजबूर करना चाहता है? उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर सुप्रीम कोर्ट की अंडे वाली टिप्पणी पर यह प्रतिक्रिया दी।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट की उन टिप्पणियों की आलोचना की जो टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई थीं। दीपके ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जज विपक्षी नेताओं के खिलाफ ऐसे बयान देते हैं तो आम आदमी के लिए क्या उम्मीद बचती है? दरअसल, मोइत्रा ने अपने कथित भड़काऊ फेसबुक पोस्ट से जुड़े एक मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुलिस पूछताछ में शामिल होने की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने महुआ की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राजनीति में कदम रखने के बाद वह सिर्फ इसलिए जांच अधिकारियों के सामने पेश होने से बच नहीं सकतीं कि उन्हें डर है कि उन पर अंडे फेंके जा सकते हैं।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि आप सांसद हैं? राजनीति में आने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? जबकि हमारे आजादी की लड़ाई लड़ने वालों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं? ऐसी याचिकाएं तो इस कोर्ट के सामने आनी ही नहीं चाहिए। बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया जिसमें महुआ को जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।

इन टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अभिजीत दीपके ने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट अब सबको गोलियां खाने के लिए मजबूर करना चाहता है? उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जज विपक्षी नेताओं के खिलाफ ऐसे बयान देते हैं तो आम आदमी के लिए क्या उम्मीद बचती है?

इससे पहले दीपके ने शुक्रवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की 'जेन Z' का बचाव करने वाली टिप्पणी का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने भागवत से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी नेतृत्व प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राष्ट्र-विरोधी करार देना बंद करे। दीपके की यह टिप्पणी भागवत द्वारा मुंबई के एक कार्यक्रम 'जेन Z' और 'जेन अल्फा' के साथ बातचीत करने के एक दिन बाद आई है। इस कार्यक्रम में भागवत ने कहा था कि युवा पीढ़ी को जायज मुद्दों पर विरोध करने का अधिकार है और उन्हें राष्ट्र-विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए।

एएनआई से बात करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि कल आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का सबसे अहम बयान यह था कि 'जेन Z' को राष्ट्र-विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध करना उनका अधिकार है और उनके मुद्दे जायज हैं। मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं।

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
अमृतसर में राष्ट्रीय लोक अदालत: एक दिन में सुलझेंगे विवाद
मुकदमे

अमृतसर में राष्ट्रीय लोक अदालत: एक दिन में सुलझेंगे विवाद

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने नेटबॉल फेडरेशन के चुनाव परिणामों पर रोक लगाई
मुकदमे

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने नेटबॉल फेडरेशन के चुनाव परिणामों पर रोक लगाई

व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट पर लगी रोक, ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की चेतावनी दी
मुकदमे

व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट पर लगी रोक, ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की चेतावनी दी

चंडीगढ़ में 12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सिविल मामलों का होगा निपटारा
मुकदमे

चंडीगढ़ में 12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सिविल मामलों का होगा निपटारा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने डाबर को राहत दी, एफएसएसएआई के आदेश पर रोक लगी
मुकदमे

दिल्ली उच्च न्यायालय ने डाबर को राहत दी, एफएसएसएआई के आदेश पर रोक लगी

चंडीगढ़ में 12 सितंबर को लगेगी न्यायिक व्यवस्था के लिए खास लोक अदालत, जिला अदालत परिसर में हेल्प डेस्क
मुकदमे

चंडीगढ़ में 12 सितंबर को लगेगी न्यायिक व्यवस्था के लिए खास लोक अदालत, जिला अदालत परिसर में हेल्प डेस्क

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण: लोक अदालत ने 18 अगस्त को फिर से सुनवाई के निर्देश दिए
मुकदमे

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण: लोक अदालत ने 18 अगस्त को फिर से सुनवाई के निर्देश दिए

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कृत्रिम मिठास के स्वास्थ्य प्रभाव पर भारत-विशिष्ट अध्ययन की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
मुकदमे

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कृत्रिम मिठास के स्वास्थ्य प्रभाव पर भारत-विशिष्ट अध्ययन की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

ताज़ा ख़बरें