होमअपराधजंतर‑मंत्र पर मारपीट केस में स्वतंत्र भारद्वाज ने जमानत के लिए पेश कीं राजनीतिक व वीडियो‑आधारित दलीलें
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जंतर‑मंत्र पर मारपीट केस में स्वतंत्र भारद्वाज ने जमानत के लिए पेश कीं राजनीतिक व वीडियो‑आधारित दलीलें

स्वतंत्र भारद्वाज ने कोर्ट में कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया और वास्तविक हमला शिकायतकर्ता द्वारा किया गया, जिसे वह वीडियो में दिखता बताया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस वीडियो पर कार्रवाई नहीं की, जबकि उनके खिलाफ एससी‑एसटी ऐक्ट और पॉक्सो ऐक्ट दोनों में FIR दर्ज हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख दिया।

14 सितंबर 2026 को 12:06 pm बजे
जंतर‑मंत्र पर मारपीट केस में स्वतंत्र भारद्वाज ने जमानत के लिए पेश कीं राजनीतिक व वीडियो‑आधारित दलीलें

सौजन्य से:- Hindustan

एससी-एसटी ऐक्ट में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज ने जेल से निकलने को अदालत में क्या दीं दलीलें

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार किए गए स्वतंत्र भारद्वाज ने जमानत पाने के लिए अदालत में दावा किया कि शिकायतकर्ता ने ही उन पर हमला किया था।

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान एक मारपीट के मामले को लेकर एससी-एसटी ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर दिल्ली की एक अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। भारद्वाज ने अदालत से राहत की मांग करते हुए कई दलीलें रखीं और कहा कि उसे राजनीतिक वजहों से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि खुद शिकायतकर्ता ने ही उस पर हमला किया था और यह वीडियो में देखा भी जा सकता है।

भारद्वाज पर आरोप है कि जून में जंतर-मंतर पर सीजेपी का आंदोलन शुरू होने के बाद एक दलित सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर के पिता पर उसने हमला किया। हाल ही में स्वतंत्र भारद्वाज को तब गिरफ्तार किया गया जब उसने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में यह कहा कि उसने सिर फोड़ दिया था, लेकिन राजनीतिक पहुंच की वजह से उसे जेल नहीं जाना पड़ा था। स्वतंत्र का वीडियो वायरल होने के बाद सीजेपी के नेताओं, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस नेताओं ने संसद मार्ग थाने जाकर आरोपी के खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने कुछ घंटे बाद उसे यूपी के बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया था।

स्वतंत्र भारद्वाज फिलहाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। आरोपी के वकील उमेश शर्मा ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता ने ही उस पर हमला किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। उमेश शर्मा ने अडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत में कहा, 'पुलिस को वो वीडियो नजर नहीं आ रहा है.... इस वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि शिकायतकर्ता ने मुझ पर हमला किया और मैं गिर गया।'

शर्मा ने अदालत को बताया कि भारद्वाज को एससी-एसटी ऐक्ट में गिरफ्तार किया गया जबकि उसके खिलाफ पॉक्सों ऐक्ट में भी एक केस दर्ज किया गया। भारद्वज की ओर से कहा गया, 'पुलिस ने मुझे 27 जून को एक नोटिस जारी किया था पूछताछ के लिए। मैं 29 जून को हाजिर हुआ था। इसके बाद मुझे जाने की अनुमति दी गई। लेकिन इसके बाद कुछ राजनीतिक घटनाक्रम की वजह से 4 सितंबर को मुझे गिरफ्तार किया गया। मेरी गिरफ्तारी के बाद एक नई एफआईआर (पॉक्सो ऐक्ट) दर्ज की गई।'

शिकायतकर्ता ने क्या कहा?

शिकायतकर्ता की ओर से वकील स्वाति खन्ना ने कहा कि भारद्वाज ने शिकायतकर्ता पर जातिगत टिप्पणियां कीं और उसने एक वीडियो में हमले की बात स्वीकार की है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि भारद्वाज ने दिल्ली हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका भी दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इस बीच दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि जब एफआईआर दर्ज की गई थी जातिगत अपशब्दों की बात नहीं कही गई थी। बाद में बयान दोबारा दर्ज किया गया और तब यह बात कहे जाने पर एससी-एसटी ऐक्ट की धारा जोड़ी गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

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