होमवकीलकरूर भगदड़ मामला: अदालत ने गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों पर सुनवाई के लिए सहमति जताई
वकील

करूर भगदड़ मामला: अदालत ने गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों पर सुनवाई के लिए सहमति जताई

करूर भगदड़ मामले में आरोप लगाया गया है कि गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें मंत्रियों का नाम भी सामने आया है।

6 जुलाई 2026 को 08:51 am बजे
करूर भगदड़ मामला: अदालत ने गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों पर सुनवाई के लिए सहमति जताई

सौजन्य से:- Amar Ujala

Karur Stampede: करूर भगदड़ मामले में गवाहों को कौन कर रहा प्रभावित? सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, कल सुनवाई

तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में एक नया मोड़ सामने आया। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि मामले के कुछ आरोपी गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत ने इस याचिका पर सात जुलाई यानी कल सुनवाई के लिए सहमति दे दी। आइए, विस्तार से जानते हैं कि आखिर कौन गवाहों को प्रभावित कर रहा है। साथ ही ये भी जानेंगे कि अब तक सीबीआई जांच कहां तक पहुंची?

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

विस्तार

तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार यानी सात जुलाई को एक अहम याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि मामले के कुछ आरोपी, जो वर्तमान सरकार में मंत्री हैं, गवाहों को सक्रिय रूप से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने अदालत को बताया कि इस मामले की जांच पहले से सीबीआई कर रही है, लेकिन अब गवाहों पर असर डालने की कोशिश की जा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

गवाहों को प्रभावित करने का आरोप क्या?

सुप्रीम कोर्ट की आंशिक कार्यदिवस पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू शामिल थे। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद कहा कि इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। याचिका में कहा गया है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनमें से कुछ मौजूदा सरकार में मंत्री हैं और वे गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आधार पर अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

सीबीआई जांच का आदेश क्यों दिया गया था?

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्तूबर 2025 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि करूर भगदड़ की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी। अदालत ने कहा था कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना न्यायहित में होगा।

जांच की निगरानी कौन कर रहा?

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति भी बनाई थी। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और एक सदस्यीय जांच आयोग के आदेशों पर रोक लगाते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि वह सीबीआई को हर संभव सहयोग दे। यह आदेश मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर दिया गया था।

मंगलवार की सुनवाई क्यों अहम?

मंगलवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों में कितना दम है और जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए। यदि अदालत को आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर लगते हैं तो वह जांच एजेंसी को आवश्यक निर्देश दे सकती है। इस कारण इस मामले की अगली सुनवाई को करूर भगदड़ जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट की गवाहों पर निगरानी, तमिलनाडु सरकार के मंत्री पर प्रभावित करने का आरोप
वकील

सुप्रीम कोर्ट की गवाहों पर निगरानी, तमिलनाडु सरकार के मंत्री पर प्रभावित करने का आरोप

कचरा डंपिंग का मामला: स्थायी लोक अदालत ने दिखाई सख्ती, कहा- समस्या का समाधान सुनिश्चित करना होगा
वकील

कचरा डंपिंग का मामला: स्थायी लोक अदालत ने दिखाई सख्ती, कहा- समस्या का समाधान सुनिश्चित करना होगा

एलन मस्क को ट्विटर धोखाधड़ी मामले में फिर से बड़ा झटका, अदालत ने उनके फैसले को रद्द करने के प्रयास को खारिज कर दिया
वकील

एलन मस्क को ट्विटर धोखाधड़ी मामले में फिर से बड़ा झटका, अदालत ने उनके फैसले को रद्द करने के प्रयास को खारिज कर दिया

सुप्रीम कोर्ट की पहल से लोन विवाद का समाधान
वकील

सुप्रीम कोर्ट की पहल से लोन विवाद का समाधान

मुंबई में खुले मैनहोल पर बीएमसी को फटकार
वकील

मुंबई में खुले मैनहोल पर बीएमसी को फटकार

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सरकारी अधिकारियों को परिश्रम करने के लिए कहा
वकील

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सरकारी अधिकारियों को परिश्रम करने के लिए कहा

गोवा में छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा को हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार किया
वकील

गोवा में छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा को हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार किया

मुहर्रम ताजिया के लिए नए मार्ग की मांग पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला: न ताजिया, न तो निशानगाही
वकील

मुहर्रम ताजिया के लिए नए मार्ग की मांग पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला: न ताजिया, न तो निशानगाही

ताज़ा ख़बरें