झांसी जेल लोक अदालत में 19 मामलों का निस्तारण, बंदियों को मिली कानूनी राहत
जिला कारागार में आयोजित लोक अदालत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ईशा त्रिपाठी और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक त्रिपाठी ने 19 बंदियों के केसों को अंतिम रूप से निपटाया। बंदियों ने स्वेच्छा से 30 दांडिक वादों में जुर्म स्वीकारोक्ति के प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें से 10 पत्र और 9 दांडिक वादों को निस्तारित किया गया, जिससे सभी प्रभावित बंदियों को त्वरित न्याय मिला।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6ac40829acc90b484a0f3561","slug":"19-cases-resolved-in-jail-lok-adalat-relief-for-inmates-jhansi-news-c-11-jhs1019-891301-2026-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: जेल लोक अदालत में 19 मामलों का निस्तारण, बंदियों को राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: जेल लोक अदालत में 19 मामलों का निस्तारण, बंदियों को राहत
विज्ञापन
झांसी। जिला कारागार में सोमवार को जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें बंदियों के 19 मामलों का पूर्ण और अंतिम रूप से निस्तारण कर उन्हें राहत प्रदान की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ईशा त्रिपाठी और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक त्रिपाठी ने कारागार में जाकर कार्रवाई पूरी कराई।
एसीजेएम प्रतीक त्रिपाठी ने कारागार में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों के मामलों की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की। उन्होंने जेल परिसर में ही बंदियों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को समझा। विचाराधीन बंदियों द्वारा स्वेच्छा से 30 दांडिक वादों में जुर्म स्वीकारोक्ति के प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें से 10 प्रार्थना पत्रों और 9 दांडिक वादों का पूर्ण एवं अंतिम रूप से निस्तारण किया गया। इस निस्तारण से कुल 19 बंदियों को कानूनी राहत मिली। सचिव ईशा त्रिपाठी ने बताया कि जेलों में निरुद्ध छोटे और सुलह-समझौते योग्य अपराधों के बंदियों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से ऐसी अदालतें आयोजित की जाती हैं।
त्वरित न्याय और भीड़ कम करने का प्रयास
जेल लोक अदालतों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इनका मुख्य लक्ष्य छोटे अपराधों में बंद बंदियों को जल्द न्याय दिलाना है। ये अदालतें सुलह-समझौते योग्य मामलों पर विशेष ध्यान देती हैं। इन प्रयासों से जेलों में बंदियों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही बंदियों को निशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्हें लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सेवाओं की जानकारी भी दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एसीजेएम प्रतीक त्रिपाठी ने कारागार में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों के मामलों की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की। उन्होंने जेल परिसर में ही बंदियों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को समझा। विचाराधीन बंदियों द्वारा स्वेच्छा से 30 दांडिक वादों में जुर्म स्वीकारोक्ति के प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें से 10 प्रार्थना पत्रों और 9 दांडिक वादों का पूर्ण एवं अंतिम रूप से निस्तारण किया गया। इस निस्तारण से कुल 19 बंदियों को कानूनी राहत मिली। सचिव ईशा त्रिपाठी ने बताया कि जेलों में निरुद्ध छोटे और सुलह-समझौते योग्य अपराधों के बंदियों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से ऐसी अदालतें आयोजित की जाती हैं।
विज्ञापन
त्वरित न्याय और भीड़ कम करने का प्रयास
जेल लोक अदालतों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इनका मुख्य लक्ष्य छोटे अपराधों में बंद बंदियों को जल्द न्याय दिलाना है। ये अदालतें सुलह-समझौते योग्य मामलों पर विशेष ध्यान देती हैं। इन प्रयासों से जेलों में बंदियों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही बंदियों को निशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्हें लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सेवाओं की जानकारी भी दी गई है।
विज्ञापन
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया बच्चों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हिंदी ई‑बुकलेट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा: वीज़ा भारत प्रवेश का पूर्ण अधिकार नहीं

सेबी की दो जांचों में ‘कोई हेरफेर नहीं’ का निष्कर्ष, फिर भी जेन स्ट्रिट को 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट का विस्तार: क्या मिलेगा सच्चा न्याय?

सुप्रीम कोर्ट ने CEC के फॉर्म‑6 बदलाव को अस्वीकृत, फैसलों पर रोक की संभावना

बेटे की जमानत लेने के बाद कोर्ट में गैरहाज़िर रहने वाले पिता को चार साल बाद फ़रीदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया

सुप्रीम कोर्ट ने दिया कड़ा संदेश: यौन अपराध रोकना, पकड़ना नहीं समाधान

सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय में करुणा को अनिवार्य बताया
ताज़ा ख़बरें
- अनिल तथा गौतम भल्ला को धनशोधन केस में 14‑दिन की न्यायिक हिरासत
- मतदाता सूची से नाम हटाने के लिये नोटिस अनिवार्य, केवल मृत वोटर को छोड़कर: न्यायमूर्ति उज्जल भुयन
- अदालत के आदेश पर पाँच महीने बाद दुष्कर्म मामला दर्ज
- केन्द्र ने तीन हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में स्वीकृति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से माँगी: रात में भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए तेज़ कदम
- सुप्रीम कोर्ट ने NDPS मामले में गिरफ्तारी के आधार न बताने पर जमानत के मुद्दे पर फैसला टाला
- कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट में अंडे फेंकने के विरोध में वकीयों ने मार्च किया, सड़क जाम
- सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार मामले में सरकार व चुनाव आयोग को नोटिस, फ़ॉर्म‑6 के बाद फिर उठे सवाल

