सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय में करुणा को अनिवार्य बताया
प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि कानून का पहला दायित्व है कि वह लोगों तक समझ में आए और साथ ही वह लोगों को समझे। उन्होंने न्याय प्रक्रिया में करुणा को सहानुभूति या दान नहीं, बल्कि पूरी मानवीय स्थिति को देख कर निर्णय लेने की अनुशासित दृष्टि बताया और थाने में कानूनी सहायता, सरल भाषा में फैसले और पीड़ितों की सुरक्षा जैसी उपायों की मांग की।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था में करुणा और संवेदनशीलता की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि कानून का पहला दायित्व है कि लोग उसे समझें और कानून भी उन्हें समझे।
नई दिल्ली: न्यायिक कार्य में करुणा और संवेदनशीलता की भूमिका पर जोर देते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि कानून का पहला दायित्व है कि जिन लोगों पर वह लागू होता है, वे उसे समझें और कानून भी उन्हें समझे।
प्रधान न्यायाधीश ने यहां दूसरे प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यानमाला में अपने संबोधन में कहा कि न्याय करने में करुणा का अर्थ सहानुभूति या दान देना नहीं, बल्कि किसी मामले के पीछे मौजूद पूरी मानवीय परिस्थिति को समझने की अनुशासित दृष्टि है।
थाने में ही कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर
उन्होंने पुलिस थाने में ही कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता बताई जहां कोई बच्चा या पीड़ित आरोपी के सामने आए बिना गवाही दे सके, तथा ऐसी सरल भाषा में फैसले लिखने की वकालत की, जिन्हें मुकदमे में शामिल लोग पढ़ और समझ सकें।
'करुणा के बिना विवेक महज औपचारिक प्रक्रिया'
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'न्याय करने में करुणा से हमारा यही आशय है। यह न तो सहानुभूति है, न दान और न ही तराजू के पलड़े को किसी एक पक्ष की ओर झुकाना है, बल्कि यह किसी मामले के पीछे मौजूद पूरी मानवीय परिस्थिति को देखने का अनुशासन है, क्योंकि विवेक के बिना करुणा मनमानी की ओर बढ़ जाती है और करुणा के बिना विवेक महज औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाता है।'
उन्होंने कहा कि करुणा न्याय व्यवस्था के 'अदृश्य पीड़ितों' तक भी पहुंचनी चाहिए, जैसे लैंगिक हिंसा से बची पीड़ित महिला/व्यक्ति, विचाराधीन कैदी का परिवार या दिव्यांग व्यक्ति। उन्होंने कहा कि तकनीक न्याय की प्रक्रिया को तेज कर सकती है, लेकिन उसे निष्पक्ष नहीं बना सकती।
लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।
विशेषज्ञता
उत्तर भारत के राज्यों की सियासी व आपराधिक घटनाक्रम पर अच्छी पकड़, किताबों के जरिए इतिहास को वर्तमान के पन्नों में खंगालने की कोशिश।
पत्रकारिता अनुभव
रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा 'राशन चोरी' का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।
शिक्षा/पुरस्कार
मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सेबी की दो जांचों में ‘कोई हेरफेर नहीं’ का निष्कर्ष, फिर भी जेन स्ट्रिट को 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट का विस्तार: क्या मिलेगा सच्चा न्याय?

सुप्रीम कोर्ट ने CEC के फॉर्म‑6 बदलाव को अस्वीकृत, फैसलों पर रोक की संभावना

बेटे की जमानत लेने के बाद कोर्ट में गैरहाज़िर रहने वाले पिता को चार साल बाद फ़रीदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया

सुप्रीम कोर्ट ने दिया कड़ा संदेश: यौन अपराध रोकना, पकड़ना नहीं समाधान

अनिल तथा गौतम भल्ला को धनशोधन केस में 14‑दिन की न्यायिक हिरासत

मतदाता सूची से नाम हटाने के लिये नोटिस अनिवार्य, केवल मृत वोटर को छोड़कर: न्यायमूर्ति उज्जल भुयन

अदालत के आदेश पर पाँच महीने बाद दुष्कर्म मामला दर्ज
ताज़ा ख़बरें
- केन्द्र ने तीन हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में स्वीकृति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से माँगी: रात में भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए तेज़ कदम
- सुप्रीम कोर्ट ने NDPS मामले में गिरफ्तारी के आधार न बताने पर जमानत के मुद्दे पर फैसला टाला
- कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट में अंडे फेंकने के विरोध में वकीयों ने मार्च किया, सड़क जाम
- सीनियर पुलिस पर आरोपों में कोई ठोस सबूत नहीं – दिल्ली हाई कोर्ट ने दंगों की जाँच जारी रखने का फ़ैसला
- सुप्रीम कोर्ट में तीन प्रमुख न्यायमूर्ति पदोन्नत, सुनीता अगारवाल के साथ महिलाओं की संख्या हुई तीन
- सिंगापुर से लौटते ही नायब सैनी ने ली दो प्रमुख बैठकों की जिम्मेदारी, कानून व्यवस्था समीक्षा और निवेश पर कैबिनेट चर्चा
- सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी ज्ञानेश कुमार मामले में सरकार व आयोग को नोटिस, फ़ॉर्म‑6 टिप्पणी के बाद सवालों की बौछार

