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रॉयल कॉलेज पर बीकॉम प्रवेश में धोखाधड़ी का आरोप, अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किया

गाजियाबाद की सिविल जज अर्पिता यादव ने बलबीर सिंह गोगिया के प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में स्वीकार कर 29 सितंबर को सुनवाई तय की, पुलिस जांच की आवश्यकता नहीं पाई।

14 सितंबर 2026 को 09:05 pm बजे
रॉयल कॉलेज पर बीकॉम प्रवेश में धोखाधड़ी का आरोप, अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किया

सौजन्य से:- Amar Ujala

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Ghaziabad News: रॉयल कॉलेज पर धोखाधड़ी का आरोप, अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज की शिकायत

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गाजियाबाद। रॉयल कॉलेज में बीकॉम में प्रवेश के नाम पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाते हुए दाखिल प्रार्थनापत्र को अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्पिता यादव की अदालत ने मामले में पुलिस से जांच कराने की जरूरत नहीं मानी। अदालत ने परिवाद के तहत मामले की सुनवाई करते हुए बयान के लिए 29 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

बलबीर सिंह गोगिया ने अदालत में दाखिल प्रार्थनापत्र में रॉयल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और उससे जुड़े पदाधिकारियों पर उनके बेटे के बीकॉम में प्रवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। बलबीर के अनुसार उनका बेटा नवजीत सिंह गोगिया वर्ष 2024-25 में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश के लिए प्रयास कर रहा था। इसी दौरान रॉयल कॉलेज में बीकॉम में प्रवेश के लिए संपर्क किया गया। आरोप है कि 29 जुलाई 2025 को कॉलेज में प्रवेश के दौरान दो लाख रुपये दान और 25 हजार रुपये प्रवेश व पंजीकरण शुल्क के नाम पर लिए गए। इसके बाद यूनिफॉर्म के लिए आठ हजार रुपये भी लिए गए। आरोप है कि कॉलेज की ओर से प्रवेश और अन्य प्रक्रिया से संबंधित रसीद, आई कार्ड और लाइब्रेरी कार्ड जारी किए गए और उनका बेटा नियमित रूप से कॉलेज जाकर पढ़ाई करता रहा। बाद में परीक्षा फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने प्रवेश नहीं होने की जानकारी दी। प्रार्थी का आरोप है कि इस संबंध में जानकारी मांगने पर कॉलेज की ओर से अतिरिक्त रकम की मांग की गई और शिकायत करने पर धमकियां भी दी गईं। उन्होंने पुलिस और कई उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। अदालत ने प्रार्थनापत्र और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।

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बलबीर सिंह गोगिया ने अदालत में दाखिल प्रार्थनापत्र में रॉयल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और उससे जुड़े पदाधिकारियों पर उनके बेटे के बीकॉम में प्रवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। बलबीर के अनुसार उनका बेटा नवजीत सिंह गोगिया वर्ष 2024-25 में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश के लिए प्रयास कर रहा था। इसी दौरान रॉयल कॉलेज में बीकॉम में प्रवेश के लिए संपर्क किया गया। आरोप है कि 29 जुलाई 2025 को कॉलेज में प्रवेश के दौरान दो लाख रुपये दान और 25 हजार रुपये प्रवेश व पंजीकरण शुल्क के नाम पर लिए गए। इसके बाद यूनिफॉर्म के लिए आठ हजार रुपये भी लिए गए। आरोप है कि कॉलेज की ओर से प्रवेश और अन्य प्रक्रिया से संबंधित रसीद, आई कार्ड और लाइब्रेरी कार्ड जारी किए गए और उनका बेटा नियमित रूप से कॉलेज जाकर पढ़ाई करता रहा। बाद में परीक्षा फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने प्रवेश नहीं होने की जानकारी दी। प्रार्थी का आरोप है कि इस संबंध में जानकारी मांगने पर कॉलेज की ओर से अतिरिक्त रकम की मांग की गई और शिकायत करने पर धमकियां भी दी गईं। उन्होंने पुलिस और कई उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। अदालत ने प्रार्थनापत्र और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।

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