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सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को पैक्ड फूड चेतावनी लेबल के 365‑दिन की स्वैच्छिक अवधि पर सवाल किया

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से पूछताछ की कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम वाले अधिक चीनी, नमक या वसा वाले पैक्ड खाद्य पर लाल हेक्सागन चेतावनी लेबल लागू करने के लिए एक वर्ष का समय क्यों चाहिए। कोर्ट ने अब तक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए और कदम उठाने की जरूरत है।

29 सितंबर 2026 को 05:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को पैक्ड फूड चेतावनी लेबल के 365‑दिन की स्वैच्छिक अवधि पर सवाल किया

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड खाद्य पदार्थों पर प्रस्तावित फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी लेबल को लागू करने में 365 दिन की स्वैच्छिक अवधि पर FSSAI से सवाल किया। प्रस्ताव में ज्यादा चीनी, नमक या वसा वाले उत्पादों पर सफेद पृष्ठभूमि में लाल हेक्सागन लगाने की बात है।

नई दिल्ली: पैक्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FoPL) लागू करने की प्रस्तावित समय-सीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) पूछा कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा है तो अथॉरिटी को इसमें इतना समय क्यों चाहिए?

पीठ ने FSSAI की प्रस्तावित 365 दिन की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि पर सवाल उठाया। अदालत ने पूछा, 'आप सुनवाई और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया फिर से शुरू क्यों करना चाहते हैं? आपने 2022 में शुरुआत की थी, पिछले 4 साल में आपने क्या किया?'

पूरी कवायद देश और नागरिकों के हित में की जा रही है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत अब तक FSSAI की ओर से किए गए प्रयासों और पहल की सराहना करती है, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है।

अदालत ने कहा कि पूरी कवायद देश और नागरिकों के हित में की जा रही है और FSSAI से अपेक्षा है कि वह अदालत के आदेश की भावना के अनुरूप कदम उठाए।

FSSAI की ओर से अदालत को बताया गया कि 2022 में जो प्रक्रिया शुरू की गई थी, वह इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग (INR) स्टार-रेटिंग सिस्टम से संबंधित थी और उस समय इस्तेमाल किए गए मानदंड मौजूदा प्रस्ताव से पूरी तरह अलग थे।

पीठ ने सुनवाई पूरी करने के बाद मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

'एनर्जी ड्रिंक' शब्द पर रोक, दिल्ली हाई कोर्ट ने FSSAI से किया सवाल- नोटिस क्यों नहीं दिया?

रेड बुल ने अपने प्रॉडक्ट के लिए 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द का इस्तेमाल बंद करने के FSSAI के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को जस्टिस अमित महाजन ने FSSAI से पूछा कि आदेश जारी करने से पहले कंपनी को कारण बताओ नोटिस दिया गया था या अपना पक्ष रखने का मौका मिला था? कोर्ट ने कहा कि अगर कंपनी को नोटिस या सुनवाई का मौका नहीं दिया गया, तो आदेश रद्द करना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या ऐसी कोई आपात स्थिति थी, जिसके कारण कंपनी को सुने बिना कार्रवाई करनी जरूरी थी?

पैक्ड फूड पर दिखेगा लाल हेक्सागन, ज्यादा चीनी-नमक और वसा वाले उत्पादों पर चेतावनी

FSSAI ने अब पैक्ड खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में मौजूद स्वास्थ्य के लिए चिंता वाले पोषक तत्वों की जानकारी देने के लिए लाल हेक्सागोनल चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है। इसमें चीनी, वसा और नमक जैसे पोषक तत्वों की अधिक मात्रा वाले उत्पादों के पैकेट के सामने लाल हेक्सागन को सफेद चौकोर पृष्ठभूमि पर प्रदर्शित किया जाएगा।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें

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