हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिए कड़े निर्देश, सरकारी अस्पतालों में बेकार पड़े उपकरणों की जांच करनी होगी
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में बेकार पड़े चिकित्सा उपकरणों पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों को ऐसे उपकरणों का ऑडिट कराना होगा और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

सौजन्य से:- Jagran
सरकारी अस्पतालों में बेकार पड़े उपकरणों को लेकर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार को दिए कड़े निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के चिकित्सा उपकरणों के बेकार पड़े रहने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे जनता के पैसों की भारी बर ...और पढ़ें
HighLights
- हाई कोर्ट ने बेकार पड़े चिकित्सा उपकरणों पर नाराजगी जताई।
- जनता के पैसों की बर्बादी बताते हुए ऑडिट का निर्देश।
- दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों को रिपोर्ट देनी होगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए चिकित्सा उपकरणों के वर्षों तक बेकार पड़े रहने पर कड़ी नाराजगी जताई है।
कोर्ट ने इसे जनता के पैसों की भारी बर्बादी बताते हुए दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों को ऐसे उपकरणों का ऑडिट कराने और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कई सालों तक मशीन बंद पड़ी रही
न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की विशेष पीठ ने यह आदेश उस समय दिया, जब दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) ने बताया कि पीईटी स्कैन में इस्तेमाल होने वाली पीईटी साइक्लोट्रान मशीन कई वर्षों तक विशेषज्ञ डॉक्टर और जरूरी मंजूरियां नहीं मिलने के कारण बंद पड़ी रही।
बताया कि 15.42 करोड़ की लागत से खरीदी गई मशीन का वर्षों तक उपयोग न होना सार्वजनिक संसाधनों की भारी बर्बादी को दर्शाता है।
5 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक शपथपत्र दाखिल कर बताएं कि कौन-कौन से उपकरण उपयोग में नहीं हैं, उनकी खरीद कब और कितनी लागत से हुई, उनका उद्देश्य क्या था और वे अब तक इस्तेमाल क्यों नहीं किए जा सके। यह रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम पांच दिन पहले दाखिल करनी होगी।
अब तक नवीनीकृत भी नहीं कराया गया
इस मामले की जानकारी न्यायमित्र अशोक अग्रवाल ने दी। उन्होंने बताया कि पीईटी साइक्लोट्रान मशीन सितंबर 2017 में स्थापित की गई थी, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में अप्रैल 2022 से बंद पड़ी है। उसका लाइसेंस फरवरी 2024 में समाप्त हो गया, जिसे अब तक नवीनीकृत भी नहीं कराया गया।
यह भी पढ़ें- 127 करोड़ एक्सटॉर्शन केस: दिल्ली हाई कोर्ट से सुकेश चंद्रशेखर के चार सहयोगियों को मिली जमानत
वहीं, सुनवाई के दौरान डीएससीआई की मेडिकल आन्कोलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि मशीन के संचालन में विशेषज्ञ स्टाफ की कमी और कुछ प्रशासनिक मंजूरियां लंबित रहने के कारण देरी हुई।
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