सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव का अनुरोध खारिज, आरोपों को कल्पना बताया
विद्यार्थी विरोधों की जांच के लिए बनी हाई पावर्ड कमेटी के सदस्यत्व में बदलाव की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया, क्योंकि आरोपों को कोई ठोस सबूत नहीं मिला और उन्हें कल्पना कहा गया। कोर्ट ने कहा कि समिति, एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय जज के नेतृत्व में, अपनी जांच जारी रखेगी, पीड़ितों व गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

सौजन्य से:- ABP News
CJP प्रोटेस्ट: हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव नहीं, SC बोला- 'आरोप कल्पना पर आधारित'
छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में गठित सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि आरोप अनुमान और कल्पना पर आधारित हैं.
दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए बनी हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. एक याचिका में कमेटी के कुछ सदस्यों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया गया था. कोर्ट ने कहा है कि आरोप अनुमान और कल्पना पर आधारित हैं, उनके पीछे कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है.
जुलाई के महीने में दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर ज्यादा बलप्रयोग के आरोप लगे. मामले को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी बनाई थी. इस कमेटी को पूरे घटनाक्रम, पुलिस अधिकारियों की भूमिका और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच करनी है.
प्रशांत भूषण ने दोबारा समिति बनाने की उठाई थी मांग
10 सितंबर को हुई मामले की पिछली सुनवाई में वकील प्रशांत भूषण ने समिति को दोबारा गठित करने की मांग की थी. उन्होंने कमेटी में सदस्य बनाए गए एक पूर्व डीजीपी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि पूर्व डीजीपी कुछ ऐसे मौजूद अधिकारियों के करीबी हैं, जो जांच के दायरे में है. इसलिए, उनकी मौजूदगी से से निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है.
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा था कि उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद कमेटी का गठन किया है. अब मामले में जारी लिखित आदेश में जजों ने कहा है कि कमेटी एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज के नेतृत्व में काम कर रही है. बिना किसी ठोस आधार के उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना सही नहीं है. कोर्ट ने कहा कि कमेटी को उसका काम करने देना चाहिए.
पीड़ितों व गवाहों की सुरक्षा का ध्यान रखें- SC
लिखित आदेश में यह भी कहा गया है कि कमेटी जांच के दौरान समय-समय पर अंतरिम रिपोर्ट देगी. इसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे जरूरी निर्देश जारी कर सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने कमेटी भी निर्देश दिया है कि वह पीड़ितों व गवाहों की सुरक्षा का ध्यान रखे और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट दे.
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