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सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस बर्बरता जांच समिति के पुनर्गठन को अस्वीकार किया

दिल्ली में CJP विरोध के दौरान पुलिस की कथित अत्याचारों की जांच के लिए स्थापित पाँच सदस्यीय हाई पावर्ड इन्क्वायरी कमिटी (HPEC) का पुनर्गठन करने से अदालत ने मना कर दिया, यह कहा कि दावें केवल अटकलें हैं और समिति ने अभी तक जांच शुरू नहीं की है। कोर्ट ने समिति को पैलेट गन के प्रयोग, महिला प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और अन्य अत्यधिक हिंसा के मामलों की जांच जारी रखने, संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और गुप्त ऑनलाइन पोर्टल एवं सचिवीय सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।

16 सितंबर 2026 को 09:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस बर्बरता जांच समिति के पुनर्गठन को अस्वीकार किया

सौजन्य से:- ETV Bharat

CJP Protest: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस बर्बरता की जांच के लिए बनी समिति का पुनर्गठन से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस क्रूरता के आरोपों की जांच के लिए उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति का गठन किया था.

By PTI

Published : September 16, 2026 at 1:39 PM IST

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यों वाली उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति का पुनर्गठन करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि समिति के खिलाफ लगाए गए आरोप सिर्फ अटकलें और पहले से बनी धारणाएं हैं.

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह समिति निष्पक्षता और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों और निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ उनकी मदद करने के लिए बनाई गई है.

मंगलवार को ऑनलाइन अपलोड किए गए 10 सितंबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (HPEC) का गठन अदालत के सामने किसी एक पक्ष का पक्ष लेने के लिए नहीं किया गया है. पीठ ने कहा, "हम समिति के गठन में कोई बदलाव करने के पक्ष में नहीं हैं, खासकर तब जब इसके पुनर्गठन की मांग सिर्फ अटकलों और पहले से बनी धारणाओं पर आधारित हो, और वह भी तब जब HPEC ने अभी अपनी जांच शुरू भी नहीं की है."

सुप्रीम कोर्ट ने HPEC से कहा कि वह पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित हिंसा और उत्पीड़न, और दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति के नुकसान से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ाए. आदेश में कहा गया, "गवाहों और उन लोगों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर जताई गई चिंताओं के मद्देनजर, जो HPEC के सामने आकर अपनी बात रखना और अपनी शिकायतें बताना चाहते हैं, हम HPEC से अनुरोध करते हैं कि ऐसे संवेदनशील गवाहों को उचित सुरक्षा दी जाए और उनकी पहचान गोपनीय तथा गुप्त रखी जाए."

पीठ ने आगे कहा, ""यह कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसे कमजोर गवाहों द्वारा HPEC को दिए गए किसी भी बयान या प्रस्तुत किए गए सबूतों के संबंध में अत्यंत गोपनीयता बनाए रखी जाएगी. इसके अलावा, ऐसे गवाहों और अन्य आवश्यक हितधारकों को अपने दस्तावेज और सबूत जमा करने की सुविधा प्रदान करने के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा सकता है."

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका गुसैन, अधिवक्ता सी सोलोमन के साथ मिलकर, HPEC के प्रतिनिधि के रूप में इसकी मदद करेंगी, और आगे पक्षों के बीच एक स्वतंत्र मध्यस्थ के रूप में कार्य करेंगी.

पीठ ने कहा, "इसी तरह, हम HPEC से जल्द से जल्द एक सदस्य सचिव नियुक्त करने का भी अनुरोध करते हैं, ताकि HPEC को अपने कार्यों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लॉजिस्टिकल या अन्य सचिवीय सहायता की सुविधा मिल सके जो उसे आवश्यक हो."

इससे पहले, HPEC के पुनर्गठन की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि समिति के सदस्यों में से एक, जो एक पूर्वोत्तर राज्य के पूर्व DGP थे, "हितों के टकराव" के दायरे में थे क्योंकि वह एक ऐसे उच्च पदाधिकारी के करीबी दोस्त थे, जिनके खिलाफ जांच होने की संभावना है.

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने भी भूषण की बातों का समर्थन किया था.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन बातों का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट से ऐसे आरोपों को नजरअंदाज करने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की क्रूरता और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की जांच के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व जज आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में HPEC का गठन किया था.

अदालत ने कहा था कि समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त DGP एल आर बिश्नोई शामिल होंगे. इस HPEC का गठन कई बातों को ध्यान में रखकर किया गया है, जिनमें इसके हर सदस्य की अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के साथ-साथ समिति की विविधता और अन्य कारक शामिल हैं.

पीठ ने कहा था, "हमें भरोसा है कि HPEC की सिफारिशें इस कोर्ट के लिए बहुत मददगार साबित होंगी और समिति उन सभी मुद्दों का व्यापक मूल्यांकन कर पाएगी जिन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है."

CJP के नेतृत्व में संसद की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं; भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.

20 जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन 25 जुलाई को तब खत्म किया गया, जब धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और सरकार ने CJP की अन्य मांगें मान लीं.

यह भी पढ़ें- CJP प्रदर्शन में बच्चे पर हमले के मामले में SC सख्त, कहा- ‘तुरंत कार्रवाई करें, कोई उसे डरा नहीं सकता’

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