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सुप्रीम कोर्ट ने हाई‑पावर्ड जांच समिति में कोई बदलाव नहीं किया

सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की संभावित अत्याचार की जांच के लिए गठित पाँच सदस्यीय हाई‑पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) को पुनर्गठित करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि समिति का गठन निष्पक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर हुआ है। कोर्ट ने समिति को गवाहों की सुरक्षा और गुप्त पहचान सुनिश्चित करने के साथ‑साथ सबूत जमा करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करने का निर्देश भी दिया।

16 सितंबर 2026 को 09:05 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने हाई‑पावर्ड जांच समिति में कोई बदलाव नहीं किया

सौजन्य से:- Hindustan

हाई-पावर्ड कमेटी में कोई बदलाव नहीं होगा, CJP के प्रदर्शन में हुई पुलिसिया ज्यादती पर SC

सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए बनाई गई हाई-पावर्ड कमेटी का पुनर्गठन करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कमेटी का गठन निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ कोर्ट की सहायता करने के लिए किया गया है। किसी एक पक्ष का समर्थन करने के लिए नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी का पुनर्गठन करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पैनल के खिलाफ लगाए गए आरोप केवल अटकलें और पहले से बनी धारणाएं हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि कमेटी का गठन निष्पक्षता और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों और निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ कोर्ट की सहायता करने के लिए किया गया है।

मंगलवार को ऑनलाइन अपलोड किए गए 10 सितंबर के आदेश में बेंच ने कहा कि हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का गठन कोर्ट के सामने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के लिए नहीं किया गया है। बेंच ने कहा कि हम कमेटी के गठन में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं हैं। खासकर तब जब पुनर्गठन की मांग केवल अटकलों और पहले से बनी धारणाओं पर आधारित हो और जो हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी द्वारा अपनी जांच शुरू करने से पहले ही व्यक्त की गई हों।

गवाहों की पहचान गुप्त रखने का अनुरोध

सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी से कहा कि वह पैलेट गन के इस्तेमाल, टारगेटेड हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न के साथ ही दोनों तरफ से हुई हिंसा और संपत्ति के नुकसान से जुड़े मामलों की अपनी जांच आगे बढ़ाए। कोर्ट ने कहा कि हम उन गवाहों और उन लोगों को जरूरी सुरक्षा और उनकी पहचान गुप्त रखने की HPEC से अनुरोध करते हैं।

सबूत जमा करने के लिए पोर्टल बनाया जा सकता है

कोर्ट ने आगे कहा कि यह बताने की जरूरत नहीं है कि ऐसे संवेदनशील गवाहों द्वारा HPEC को दिए गए बयानों या सबूतों के मामले में पूरी गोपनीयता बरती जाएगी। इसके अलावा, ऐसे गवाहों और अन्य जरूरी लोगों के लिए अपने दस्तावेज और सबूत जमा करने की सुविधा देने के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा सकता है। बेंच ने निर्देश दिया कि सीनियर एडवोकेट मोनिका गुसैन, एडवोकेट सी सोलोमन के साथ मिलकर HPEC के प्रतिनिधि के तौर पर कोर्ट की मदद करेंगी और साथ ही पक्षों के बीच एक स्वतंत्र मध्यस्थ के तौर पर काम करेंगी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क

बेंच ने कहा कि हम HPEC से यह भी अनुरोध करते हैं कि वह जल्द से जल्द एक सदस्य सचिव नियुक्त करे ताकि HPEC को अपने काम को पूरा करने के लिए जरूरी लॉजिस्टिकल या अन्य सेक्रेटेरियल मदद मिल सके। इससे पहले HPEC के पुनर्गठन की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पैनल के सदस्यों में से एक हितों के टकराव की स्थिति में थे। पूर्वोत्तर राज्य के पूर्व डीजीपी रहे यह सदस्य एक ऐसे उच्च अधिकारी के करीबी दोस्त थे, जिनकी जांच होने की संभावना थी। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने भी भूषण की बातों का समर्थन किया।

सुप्रीम कोर्ट ने HPEC का गठन किया था

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह ऐसे आरोपों को नजरअंदाज करे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की जांच के लिए पूर्व शीर्ष अदालत के जज आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में HPEC का गठन किया था। इसमें कहा गया था कि इस कमिटी में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डीजीपी एल.आर. बिश्नोई शामिल होंगे।

बेंच ने कहा था कि इस HPEC का गठन कई बातों को ध्यान में रखकर किया गया है। इसमें इसके हर सदस्य की अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के साथ-साथ कमिटी की विविधता और अन्य कारक भी शामिल हैं। हमें भरोसा है कि HPEC की सिफारिशें इस कोर्ट के लिए बहुत मददगार साबित होंगी। कमिटी उन सभी मुद्दों का व्यापक मूल्यांकन कर पाएगी जिन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

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