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हाईकोर्ट ने नशा तस्करी मामले में CBI को सौंपी जांच

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू के भुंतर में नशा तस्करी मामले में CBI को जांच सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने स्थानीय पुलिस की जांच में कई गंभीर कमियां पाईं और मामले को निष्पक्ष जांच के लिए CBI को सौंपने का फैसला किया।

14 जुलाई 2026 को 02:14 am बजे
हाईकोर्ट ने नशा तस्करी मामले में CBI को सौंपी जांच

सौजन्य से:- ETV Bharat

हाईकोर्ट ने नशा तस्करी से जुड़े मामले में CBI को सौंपी जांच, अदालत ने स्थानीय पुलिस की जांच में पाई कई गंभीर कमियां

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शुरुआती स्तर पर केवल आरोपों के आधार पर FIR रद्द नहीं की जा सकती.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : July 14, 2026 at 6:51 AM IST

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू के भुंतर में कार सवारों से चरस और 4 लाख रुपये नकद बरामद करने के मामले में बड़ा आदेश दिया है. हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता जामयांग तेसरिंग और अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानि CBI को सौंपने के निर्देश दिए हैं. याचिकाकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन भुंतर में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. अदाल ने स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में खामियां पाते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शुरुआती स्तर पर केवल आरोपों के आधार पर FIR रद्द नहीं की जा सकती, क्योंकि पुलिस रिकॉर्ड में प्रतिबंधित पदार्थ की बरामदगी दिखाई गई है. लेकिन, अदालत ने पुलिस की जांच और केस डायरी में कई गंभीर कमियां भी पाईं. पुलिस यह नहीं बता सकी कि आरोपियों को शाम करीब 6:50 बजे से रात 1:30 बजे तक लगभग सात घंटे मौके पर ही क्यों रोके रखा गया. साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि ई-साक्ष्य ऐप काम नहीं कर रहा था, इसलिए कार्रवाई की रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी.

इसके अलावा याचिकाकर्ता जामयांग तेसरिंग को किस परिस्थिति में वाहन की टक्कर लगी और वह गंभीर रूप से घायल कैसे हुआ, इसका भी संतोषजनक जवाब पुलिस नहीं दे सकी. हाईकोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा करना उचित नहीं होगा. लिहाजा अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पूरा मामला सीबीआई को सौंपने के आदेश दे दिए.

वहीं, इस मामले में पुलिस की ओर से कहा गया कि मामला 22 फरवरी 2026 की शाम भुंतर के सिउंड का है. मौके पर लगाए गए नाके पर पुलिस की ओर से मणिकर्ण की तरफ से आ रही एक कार को रोका गया. कार में सवार तीन लोगों की तलाशी ली गई. पुलिस ने दावा किया कि इस दौरान उनके पास 28 ग्राम चरस और एक सूटकेस से 4 लाख रुपए बरामद किए गए. इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया. हालांकि अदालत के सामने सुनवाई के दौरान पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठे.

वहीं, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाए कि, यह पूरा मामला झूठा और मनगढ़ंत है. उनके अनुसार जामयांग तेसरिंग 29 जनवरी 2026 को अमेरिका से भारत लौटा था और अपने साथियों के साथ नया स्टार्टअप शुरू करने के लिए मनाली और मणिकर्ण क्षेत्र में जगह देखने गया था. लौटते समय पुलिस ने उनकी गाड़ी रोकी और 4 लाख रुपये नकद देखकर जबरन वसूली की कोशिश की. विरोध करने पर पुलिस ने उनके बैग में खुद चरस का पैकेट रख दिया. उनका आरोप था कि उन्हें कई घंटे तक बिना खाना-पानी के मौके पर रोके रखा गया. इसी दौरान धक्का लगने के बाद जामयांग तेसरिंग सड़क पर गिर गया, जहां एक टेंपो ट्रैवलर की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इन्हीं आरोपों और पुलिस जांच में सामने आई विसंगतियों के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं.

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