बिल्हौर-घाटमपुर के वादकारियों का संघर्ष जारी है
बिल्हौर-घाटमपुर के वादकारियों को अब माननीय हाई कोर्ट से उम्मीदें हैं कि वहां से जल्द ही उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

शासन की मंजूरी के बाद भी 'माती' की दौड़ लगाने को मजबूर बिल्हौर-घाटमपुर के वादकारियों का संघर्ष जारी है। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 14 जून 2019 को अधिसूचना संख्या-527/सात-न्याय-2-2019-191जी/2017 जारी कर दोनों तहसीलों को वापस कानपुर नगर कोर्ट से जोड़ने की मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण यह फैसला आज तक जमीन पर लागू नहीं हो सका है।
अजय कुमार द्विवेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प० रवीन्द्र शर्मा द्वारा लगातार की गई अपीलों के बाद शासन ने यह कदम उठाया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महानिबंधक को पत्र लिखकर इस अधिसूचना पर तत्काल नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
अधिवक्ताओं और स्थानीय सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि वर्ष 2013 से शुरू हुआ यह संघर्ष शासन स्तर पर तो जीत लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कमियों के चलते जनता आज भी पिस रही है। अब उन्हें माननीय हाई कोर्ट से बड़ी उम्मीदें हैं कि वहां से जल्द ही राहत मिलेगी। Legal Report by Ali Hammad के अनुसार, वादकारियों और वकीलों की मुख्य परेशानियां दूरी और आर्थिक बोझ, पुलिस और कानून व्यवस्था पर असर, और राजस्व का नुकसान हैं।
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