बगहा न्यायालय ने 6 महीने में 8 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी, बना बिहार का पहला न्यायालय।
बगहा न्यायालय ने नए कानून के तहत गंभीर मामलों में सजा सुनाने वाला बिहार का पहला न्यायालय बन गया है। यहाँ पढ़ें विस्तार।

सौजन्य से:- Jagran
बगहा न्यायालय ने नए कानून के तहत छह महीने में आठ दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
बगहा न्यायालय भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर मामलों में सजा सुनाने वाला बिहार का पहला न्यायालय बन गया है। अदालत ने मात्र छह महीने में हत्या और मानव ...और पढ़ें
HighLights
- बगहा कोर्ट BNS के तहत सजा सुनाने वाला बिहार का पहला।
- छह महीने में आठ दोषियों को हत्या, मानव तस्करी में उम्रकैद।
- अदालत ने त्वरित न्याय का नया कीर्तिमान स्थापित किया।
विनोद राव, बगहा ( पश्चिम चंपारण )। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के बाद बगहा न्यायालय ने त्वरित न्याय की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने नए कानून के तहत गंभीर मामलों में सजा सुनाने वाली बिहार की पहली अदालत बन गई है।
अदालत ने मात्र छह महीने में हत्या व मानव तस्करी के अलग-अलग मामलों में कुल आठ दोषियों को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है।
इस सफलता के पीछे अदालत की सक्रियता, लोक अभियोजन के पदाधिकारी मन्नु राव व जितेंद्र भारती की मेहनत भी रही। जिसने त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की।
कोर्ट द्वारा सुनाए गए मुख्य फैसलों में मानव तस्करी के संगीन अपराध में शामिल मां-बेटे और रामनगर के बहुचर्चित पिंटू हत्याकांड में संलिप्त मां व उसके दो बेटों को उम्रकैद की सजा शामिल है।
इसके अतिरिक्त, वाल्मीकिनगर के चर्चित पूजा हत्याकांड में कोर्ट ने मात्र चार महीने के रिकार्ड समय में मुख्य आरोपित अजय सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर त्वरित न्याय का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है।
केस एक
धनहा थाना क्षेत्र के कटार गांव निवासी अमित पटेल को नए कानून के तहत आजीवन कारावास की पहली सजा मिली। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ की अदालत ने उसे एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अभियोजन के अनुसार 11 अक्टूबर 2024 को अमित ने अपनी पत्नी सरिता देवी की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। मामला अदालत पहुंचने के बाद स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई हुई और महज तीन महीने में 10 फरवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए अदालत ने उसे दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई।
केस दो
धनहा थाना क्षेत्र के दौनाहा गांव में 23 जून 2025 की रात नेहा उर्फ नूरजहां ने अपने पति मनोज राम की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तेजी से सुनवाई कराई। सिर्फ 30 दिनों के भीतर सभी आठ गवाहों की गवाही पूरी कर ली गई और करीब आठ महीने के अंदर 20 फरवरी 2026 फैसला सुनाते हुए नेहा को आजीवन कारावास की सजा दी गई।
केस तीन
रामनगर थाना क्षेत्र के मुड़िला गांव में 26 दिसंबर 2024 को नाली विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। इस घटना में गंभीर रूप से घायल पिंटू यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने एक जुलाई को अनिता देवी तथा उसके दो बेटों गोलू कुमार यादव और कीर्ति यादव को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
केस चार
नौरंगिया थाना क्षेत्र में 22 जनवरी 2026 को तत्कालीन थानाध्यक्ष शुभम कुमार सिंह और मानव तस्करी निरोधक इकाई ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मानव तस्करी के मामले का खुलासा किया था। इस मामले में पश्चिम बंगाल के वर्दमान जिले के कमरदंगा हरिपुर थाना अंडाल निवासी नियोति देवी और उसके बेटे नागेश भुइयां को दोषी पाया गया। अदालत ने 13 जुलाई 2026 को दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।
खबरें और भी
केस पांच
वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र में 23 जनवरी 2026 को पूजा देवी की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। बाद में उसका शव नहर से बरामद हुआ। पुलिस जांच के बाद मामला स्पीडी ट्रायल में चला। महज चार महीने के भीतर सुनवाई पूरी करते हुए एक अगस्त 2026 को अदालत ने बक्सर निवासी अजय सिंह को दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास की सजा के साथ 50 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया गया।
मानव तस्करी मामले में पहली उम्रकैद बनी सबसे चर्चित सजा
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ की अदालत ने नए कानून से पहले भी कई चर्चित मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इनमें टीपू हत्याकांड में गुड्डू गुप्ता तथा रिटायर्ड सेना के जवान इस्माइल अंसारी से जुड़े मामले प्रमुख रहे।
हालांकि ये सभी फैसले पुराने कानून के तहत हुए थे। वहीं, नए कानून के बाद सबसे अधिक चर्चा मानव तस्करी मामले में सुनाई गई उम्रकैद की रही। इस मामले में पहली बार पश्चिमी चंपारण में एक मां और उसके बेटे को मानव तस्करी का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी गई।
लोक अभियोजक जितेंद्र भारती के अनुसार, मानव तस्करी के मामले में यह बिहार का पहला फैसला है, जिसमें दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
आगरा ऑनर किलिंग मामले में चाचा और चाची को अग्रिम जमानत से इनकार

उदयनिधि स्टालिन को मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देश पर आज ही रिहा किया जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने माणिकराव कोकाटे को राहत दी, बॉम्बे हाईकोर्ट को छह महीने में अंतिम फैसला तकना होगा

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: आरोपी कंपनी को पहले कटघरे में नहीं होना चाहिए, अदालत ने सुनिश्चित किया

बीजेपी के बिहार नेतृत्व को चुनौती देने के लिए प्रशांत किशोर ने बांकीपुर फैसले को पीएम को संदेश क़रार दिया

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों पर नकेल कसने, तेजी से धन वसूली का आदेश दिया

भारत में न्यायिक भाषण और व्यंग्यात्मक असहमति: एक संवैधानिक प्रश्न

शादी वाले ही नहीं, लिव-इन रिश्ते में भी कियी क्रूरता पर IPC की धारा 498A का लागू होगा
ताज़ा ख़बरें
- कावेरी जल विवाद: 130 साल का लंबा संघर्ष
- महाराष्ट्र हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 20 लोग बरी
- न्यायाधीशों को अब नहीं कहा जा सकता है असहाय महिला, स्वाभिमानी महिला, अन्य शब्द: न्यायालय की हैंडबुक
- SC संशोधन बिल: क्या है इस विधेयक का मकसद? लोकसभा ने हंगामे के बीच पास किया
- स्टूडेंट्स के खिलाफ केस नहीं: सरकार का वादा; सुप्रीम कोर्ट बोला- सख्ती करने वाले जवानों को न बचाएं
- 12 आरोपियों को जमानत, जम्मू-कश्मीर में फायर सर्विसेज भर्ती पेपर लीक मामले में रिहाई के आदेश
- मॉनसून सत्र: विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित
- सुप्रीम कोर्ट में CBSE की भाषा नीति पर बड़ा दाव: क्लास 9 के बच्चों पर न थोपें 3 भाषाएं...

