प्रशासनिक विफलता का ठीकरा पुलिस पर क्यों?
कानून-व्यवस्था की समस्याओं के लिए पुलिस अक्सर जिम्मेदार ठहराई जाती है, लेकिन क्या प्रशासनिक विफलता की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है?

आमतौर पर देश में जब भी कानून-व्यवस्था चरमराती है या अपराध का ग्राफ ऊपर जाता है, तो जनमानस और मीडिया का सारा गुस्सा स्वाभाविक रूप से पुलिस महकमे पर फूटता है। लेकिन कानून के एक छात्र के रूप में जब हम इस संकट की गहराई में उतरते हैं, तो एक कड़वा प्रशासनिक सच सामने आता है— पुलिस अक्सर उस अपराध की सज़ा भुगतती है, जिसका बीजारोपण राजस्व विभाग और उप-जिलाधिकारी कार्यालयों की चौखट पर होता है।
सूत्र: अली हम्माद, प्रशासनिक विफलता का ठीकरा पुलिस पर क्यों, के अनुसार राजस्व विभाग की अक्षमता और भ्रष्टाचार के कारण दो पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलते हैं या हत्या जैसी संगीन वारदात होती है, तब पुलिस को कानून-व्यवस्था की विफलता के लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जाता है?
यह गंभीर प्रशासनिक असंतुलन को देखते हुए नीति-निर्माताओं और सरकार से कुछ बुनियादी सवाल पूछना लाज़मी है: जवाबदेही का अभाव क्यों? सुधारों का चश्मा एकतरफा क्यों? सरकारें 'स्मार्ट पुलिसिंग' और तकनीकी अपग्रेडेशन पर करोड़ों खर्च करती हैं, लेकिन पुलिस को इस दलदल से निकालने के लिए राजस्व विभाग के भीतर 'प्रशासनिक सर्जरी' और डिजिटलीकरण को शत-प्रतिशत पारदर्शी बनाने की इच्छाशक्ति क्यों नहीं दिखाई देती?
संबंधित ख़बरें

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समय बदल गया है, विवाह पूर्व यौन संबंध नैतिक अधमता नहीं है

जिंदल पॉली फिल्म्स विवाद, भारत का प्रथम श्रेणी एक्शन सूट, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए भेजा

बिना शादी सहमति से संबंध खराब चरित्र का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट बोला- रिश्ता टूटने को धोखा नहीं मान सकते, कांस्टेबल की नियुक्ति को मंजूरी दी


