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देश की अदालतों में लंबे समय तक पेंडिंग केस बढ़ें, मुंबई की स्थिति चिंताजनक

भारत की अदालतों में लंबे समय तक पेंडिंग केसों की संख्या बढ़कर 4.98 करोड़ से अधिक हो गई है, जिससे न्यायिक प्रणाली पर भारी दबाव पड़ रहा है। यह स्थिति मुंबई के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां पेंडिंग केस की संख्या दिनों-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

4 अगस्त 2026 को 05:16 pm बजे
देश की अदालतों में लंबे समय तक पेंडिंग केस बढ़ें, मुंबई की स्थिति चिंताजनक

सौजन्य से:- ABP News

देश की अदालतों में करीब 5 करोड़ केस पेंडिंग, मुंबई को लेकर चौकाने वाला खुलासा

Mumbai News: केंद्र ने बताया है कि भारत की अदालतों में 4.98 करोड़ से ज़्यादा सिविल और क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं. जो ज्यूडिशियल सिस्टम पर बढ़ते बोझ को दिखाता है.

भारत की अदालतों में पेंडिंग पड़े केसों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बड़ी जानकारी दी है, केंद्र ने राज्यसभा को बताया है कि पूरे भारत की अदालतों में 4.98 करोड़ से ज़्यादा सिविल और क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं. जो ज्यूडिशियल सिस्टम पर बढ़ते बोझ को दिखाता है, जिसका असर मुंबई और महाराष्ट्र में केस लड़ने वालों पर भी पड़ता है.

नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के मुताबिक, कई केस 10, 20 और यहां तक कि 30 साल से भी ज़्यादा समय से पेंडिंग हैं. सरकार ने कहा कि देरी मुश्किल लिटिगेशन, धीमी जांच, बहुत सारे सबूत, गवाहों की कमी और कोऑर्डिनेशन की दिक्कतों की वजह से होती है.

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कानूनी सुधारों पर केंद्र का फोकस

केंद्र जस्टिस डिलीवरी सिस्टम को तेज़ करने के लिए, केंद्र टेक्नोलॉजी, डिजिटाइज़ेशन, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कानूनी सुधारों पर फोकस कर रहा है. कोर्ट की कार्रवाई को और डिजिटाइज़ करने के लिए ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के तीसरे फेज़ के लिए ₹7,210 करोड़ दिए गए हैं. केंद्र ने राज्यसभा में बताया है कि मुंबई उन शहरों में शामिल है, जहां कोर्ट में लंबे समय तक देरी होती है, केंद्र ने बताया कि करीब 5 करोड़ केस पेंडिंग हैं.

फास्ट ट्रैक कोर्ट पॉक्सो और यौन अपराधों को देते रहेंगे प्राथमिकता

सरकार ने कहा कि फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट POCSO और दूसरे यौन अपराधों के मामलों को जल्दी निपटाने को प्राथमिकता देते रहेंगे. न्यायिक कार्रवाई में तेज़ी लाने के लिए कमर्शियल कोर्ट एक्ट, स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट में भी बदलाव किए गए हैं. केंद्र सरकार कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए लोक अदालतों और अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन (ADR) सिस्टम को भी बढ़ावा दे रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा में राज्यसभा सांसद दिलीप कुमार राय के सवाल का जवाब देते हुए कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने NJDG के आंकड़े सबके सामने रखे. सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के निपटारे में दशक बीत रहे हैं. वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कुल 95,936 मुकदमे लंबित चल रहे हैं. इसमें 26 मामले ऐसे हैं जो पिछले 30 सालों से भी ज्यादा समय से पेंडिंग हैं.

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