कॉलेजियम ने वरिष्ठता को नज़रअंदाज़ कर 4‑6 क्रमांक के हाई कोर्ट जजों को सुप्रीम कोर्ट में सुझाया, विरोध का सामना
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना के मुख्य न्यायाधीशों सहित चार, पाँच और छठे क्रमांक के हाई कोर्ट जजों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने की सिफ़ारिश की, जिससे वरिष्ठता के नियम को टाला गया। यह कदम सोशल मीडिया पर पूर्व नौकरशाह, पत्रकार और रिटायर्ड इंजीनियर सहित कई लोगों ने अपारदर्शिता और पक्षपात के आरोप लगाए। यदि सरकार इस सिफ़ारिश को स्वीकार करती है, तो सुप्रीम कोर्ट की शक्ति 38‑स्थान की स्वीकृत क्षमता के भीतर 37 जजों की होगी, जिससे महिला जजों की संख्या दो से बढ़कर तीन हो जाएगी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Supreme Court Collegium: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट के जजों को शीर्ष अदालत भेजे जाने की सिफारिश की है। ऐसे में वरिष्ठता को नजरअंदाज करने पर एक पूर्व सिविल सर्वेंट, एक पत्रकार और रिटायर्ड मैकेनिकल इंजीनियर ने सोशल मीडिया X पर सवाल उठाए हैं।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार को तीन हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की। सुप्रीम कोर्ट के जारी प्रस्ताव के अनुसार, कॉलेजियम ने गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की है। अब इस सिफारिश को लेकर एक पूर्व नौकरशाह, पत्रकार और रिटायर्ड मैकेनिकल इंजीनियर ने सवाल उठाए हैं।
कॉलेजियम में CJI सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ समेत ये जज, सिफारिश पर उठे सवाल
हाई कोर्ट के तीन जजों को सुप्रीम कोर्ट में भेजे जाने की सिफारिश कॉलेजियम ने 28 सितंबर, 2026 को की है, उस सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के अलावा जस्टिस विक्रम नाथ, बीवी नागरत्ना, एमएम सुंदरेश और पीएस नरसिम्हा थे। अब कॉलेजियम की सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की तय प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया एक्स पर CCG और CFF के सदस्य आशीष जोशी ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा-'वरिष्ठता में बदलाव संस्थागत क्षरण है।'
'पक्षपात करने पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता का उपदेश नहीं'
आशीष जोशी ने लिखा-'जब कॉलेजियम अखिल भारतीय वरिष्ठता क्रम में शीर्ष तीन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को छोड़कर चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर बैठे न्यायाधीशों को पदोन्नत करता है, तो यह देश के प्रत्येक न्यायाधीश को यह संदेश देता है कि बंद दरवाजा बंद होते ही वरिष्ठता, सेवा और अपेक्षा का कोई महत्व नहीं रह जाता। आप न्यायपालिका की स्वतंत्रता का उपदेश तब तक नहीं दे सकते जब तक आप उसी अपारदर्शिता और पक्षपात का अभ्यास करते हैं जिसकी आप अन्य सभी संस्थानों में निंदा करते हैं।'
सेना, सिविल सेवा और न्यायपालिका में, वरिष्ठता में बदलाव किसी भी बाहरी खतरे से कहीं अधिक तेजी से मनोबल को नष्ट करता है। एक बार जब लोगों को यह एहसास हो जाता है कि योग्यता और वरिष्ठता वैकल्पिक हैं, तो संस्था योग्यता के बजाय लचीलेपन को प्राथमिकता देने लगती है। इसी तरह संस्थाएं अंदर से सड़ने लगती हैं।
आशीष जोशी, पूर्व नौकरशाल
वरिष्ठता नजरअंदाज करने से मेरिट खत्म
आशीष जोशी ने आगे लिखा-या तो प्रत्येक वरिष्ठता में बदलाव के स्पष्ट, लिखित कारण बताएं या प्रक्रिया को निष्पक्ष होने का दिखावा करना बंद करें। चुप्पी स्वतंत्रता नहीं है। यह केवल जवाबदेही से परे शक्ति है।
वहीं, एक और यूजर और रिटायर्ड मैकेनिकल इंजीनियर ने लिखा-'सुपरसेशन (वरिष्ठता को नजरअंदाज करना) मेरिट को खत्म कर देता है। मेरिट प्राकृतिक न्याय है और सुपरसेशन विश्वसनीयता को कम करता है।'
सोशल मीडिया एक्स पर एक पत्रकार ने लिखा-'सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 3 हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट करने के लिए उनके नामों की सिफारिश की है। दिलचस्प बात यह है कि ऑल इंडिया सीनियरिटी के हिसाब से नंबर 1, 2 और 3 को नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि नंबर 4, 5 और 6 की सिफारिश की गई। पत्रकार ने जजों की एक लिस्ट भी शेयर की है।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की क्षमता बढ़कर 37 हो जाएगी
अगर केंद्र सरकार कॉलेजियम की इन सिफारिशों को मान लेती है तो इन नियुक्तियों का ऐलान किया जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 38 की स्वीकृत क्षमता (CJI सहित) के मुकाबले 37 हो जाएगी। इससे शीर्ष अदालत में महिला जजों की संख्या भी दो से बढ़कर तीन हो जाएगी।
लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।
दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।
दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।
नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।
दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।... और पढ़ें
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