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सोनिया गांधी ने मतदाता सूची मामले में अदालत में जवाब दाखिल किया, 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में शामिल होने के आरोप से जुड़े एक मामले में अदालत ने उनका जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को अतिरिक्त दस्तावेजों संबंधी आवेदन में जवाब दाखिल करने की मांग की। मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

5 जुलाई 2026 को 06:23 pm बजे
सोनिया गांधी ने मतदाता सूची मामले में अदालत में जवाब दाखिल किया, 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

सौजन्य से:- Jagran

मतदाता सूची मामले में सोनिया गांधी ने अदालत में दाखिल किया जवाब, 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

सोनिया गांधी ने मतदाता सूची मामले में अदालत में अपना जवाब दाखिल किया है, जिसमें भारतीय नागरिकता मिलने से पहले उनका नाम सूची में शामिल होने का आरोप है। ...और पढ़ें

HighLights

- सोनिया गांधी ने मतदाता सूची मामले में जवाब दाखिल किया।

- नागरिकता से पहले नाम शामिल होने का आरोप है।

- मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ने उस मामले में अदालत में अपना जवाब दाखिल किया है, जिसमें भारतीय नागरिकता मिलने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज रिकार्ड पर लेने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अतिरिक्त दस्तावेजों संबंधी आवेदन पर जवाब दाखिल किया। अदालत ने आदेश में दर्ज किया कि जवाब की प्रति याचिकाकर्ता को भी उपलब्ध करा दी गई है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि मामला लगभग आधी सदी पुराना है और अब जांच किसकी होगी, यह भी विचारणीय है।

सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग

मामला अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है। विकास त्रिपाठी ने सोनिया गांधी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की मांग करते हुए शिकायत दायर की थी, जिसे राउज एवेन्यू कोर्ट के एसीजेएम ने खारिज कर दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका लंबित है।

याचिका में आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज कर लिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि मई में उसने वर्ष 1980 की निर्वाचन आयोग की एक रिपोर्ट को अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में रिकार्ड पर लेने का आवेदन दिया था।

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उनका नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में दर्ज

सुनवाई के दौरान पहले अदालत ने सोनिया गांधी के वकील से पूछा था कि यदि उनका नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में दर्ज हुआ, तो इस पहलू को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है। वहीं, सोनिया गांधी की ओर से कहा गया कि यह केवल तथ्यों की तलाश में की जा रही जांच (फिशिंग एंड रोविंग इंक्वायरी) है और निचली अदालत ने शिकायत खारिज कर सही फैसला दिया था।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि भारतीय नागरिक बने बिना किसी का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच फर्जी दस्तावेज या धोखाधड़ी के पहलू से होनी चाहिए।

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