सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में बंगाल के हटे हुए मतदाताओं को मिलेगा नाम जोड़ने का अवसर
न्यायालय 16 अक्टूबर को बंगाल की वोटर लिस्ट से हटाए गए मतदाताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। अदालत ने अपीलों के शीघ्र निपटारे की माँग को स्वीकार किया, ताकि प्रभावित नागरिक स्थानीय निकाय चुनावों में वोट दे सकें। सुनवाई में सॉफ्टवेयर संबंधी तकनीकी समस्याओं का भी उल्लेख हुआ।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली से आयी खबर- बंगाल की वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 16 को
सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले बंगाल के उन मतदाताओं के लिए अच्छी खबर आयी है, जिनके नाम SIR में वोटर लिस्ट से काट दिये गये. इनकी याचिकाओं पर 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. जानें सर्वोच्च अदालत में क्या-क्या हुआ.
Bengal SIR: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से पहले देश की राजधानी नयी दिल्ली से बंगाल के वोटरों के लिए अहम खबर आयी. सुप्रीम कोर्ट बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़ी याचिकाओं पर 16 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. इस दिन उन याचिकाओं पर सुनवाई होगी, जिनमें अपीलों का जल्द निपटारा करने और प्रभावित मतदाताओं को नवंबर में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में वोट देने का अवसर सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है. इन लोगों के नाम पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटा दिये गये थे. इन्होंने वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर रखी है.
नाम जोड़ने की अपीलों को पहले निपटाने का सुझाव
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह SIR अपीलीय न्यायाधिकरणों की कठिनाइयों के बारे में जानता है. अदालत ने संकेत दिया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग वाली अपीलों को बाद के लिए रखते हुए पहले उन मामलों पर फैसला करने को कहा जा सकता है, जिनमें मतदाता अपना नाम सूची में शामिल कराने की मांग कर रहे हैं.
नवंबर के निकाय चुनाव से पहले फैसला जरूरी
याचिकाकर्ताओं की चिंता है कि अपीलों का निपटारा समय पर नहीं हुआ, तो प्रभावित मतदाता आगामी निकाय चुनावों में वोट नहीं कर पायेंगे. याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत से लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा कराने का अनुरोध किया.
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उपचुनाव में वोट नहीं दे पाने का भी उठाया मुद्दा
प्रशांत भूषण ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाये गये हैं, वे असमंजस में हैं कि उन्हें स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान करने दिया जायेगा या नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि हाल में हुए उपचुनावों में संबंधित मतदाताओं को वोट देने की अनुमति नहीं मिली थी. ऐसे में अपीलों पर समय रहते फैसला होना जरूरी है.
न्यायाधिकरणों में तकनीकी समस्याएं भी चुनौती
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया. पीठ ने कहा कि इन कठिनाइयों का समाधान करने की कोशिश की जा रही है. न्यायाधिकरणों के सामने लंबित मामलों को समय पर निपटाना और तकनीकी अड़चनों को दूर करना इस प्रक्रिया की अहम चुनौती है.
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93% अपील मंजूर होने का वकीलों ने किया दावा
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि न्यायाधिकरणों में अब तक निपटायी गयी अपीलों में से 93 प्रतिशत को मंजूरी दी जा चुकी है. उन्होंने इसी आधार पर लंबित अपीलों का जल्द निपटारा करने का अनुरोध किया, ताकि पात्र मतदाताओं को आगामी चुनावों में मतदान करने का अवसर मिल सके.
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