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पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी को 10 साल की कैद, अदालत ने दिया कठोर संदेश

मुजफ्फरनगर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रेप के मामले में पीड़िता से विवाह करना अपराध से बचने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने किशोरी के अपहरण और बलात्कार के आरोपी को 10 वर्ष की सजा सुनाई।

30 जुलाई 2026 को 04:33 am बजे
पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी को 10 साल की कैद, अदालत ने दिया कठोर संदेश

सौजन्य से:- Navbharat Times

मुजफ्फरनगर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेप के मामले में पीड़िता से विवाह कर लेना कानून से बचने का आधार नहीं बन सकता।

रामबाबू मित्तल, मुजफ्फरनगर: यूपी के मुजफ्फरनगर में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज दुष्कर्म के एक अहम मामले में विशेष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अपराध के बाद पीड़िता से विवाह कर लेना कानून से बचने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने सहारनपुर के देवबंद निवासी दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए कहा कि विवाह किसी भी गंभीर लैंगिक अपराध को न तो वैध बना सकता है और न ही उसकी गंभीरता को कम कर सकता है।

यह मामला वर्ष 2021 का है। पुरकाजी थाना क्षेत्र से 20 जनवरी, 2021 को एक किशोरी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। दो दिन बाद उसके पिता ने सहारनपुर निवासी युवक और उसके पिता के खिलाफ अपहरण तथा पॉक्सो अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मामला अदालत पहुंचा।

2023 में आरोपी ने पीड़िता से शादी कर ली

मुकदमे की सुनवाई के बीच आरोपी जमानत पर रिहा हो गया। इसके बाद उसने सितंबर 2023 में पीड़िता से विवाह कर लिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इसी विवाह का हवाला देते हुए अदालत से राहत देने की मांग की। हालांकि अदालत ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि किसी भी आपराधिक कृत्य का मूल्यांकन उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर किया जाता है, न कि बाद में बने पारिवारिक संबंधों या पक्षकारों की भावनाओं के आधार पर।

क्या बोले विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिद्धू?

विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिद्धू ने अपने फैसले में कहा कि यदि ऐसे मामलों में विवाह को आधार बनाकर अभियुक्तों को राहत दी जाने लगे तो इससे न्याय व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और कानून के शासन पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा। अदालत ने यह भी कहा कि बलात्कार केवल किसी एक महिला के विरुद्ध अपराध नहीं, बल्कि उसकी गरिमा, सम्मान और पूरे समाज की नैतिक चेतना पर गंभीर हमला है। इसलिए ऐसे मामलों में कठोर दंड देना न्याय व्यवस्था का दायित्व है।

इन धाराओं में सुनाई गई सजा

अदालत ने दोषी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4(1) के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और आठ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की समकक्ष धाराओं (पूर्व आईपीसी धारा 366) के तहत सात वर्ष का कारावास और चार हजार रुपये अर्थदंड तथा अपहरण (पूर्व धारा 363) के तहत पांच वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड भी दिया गया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने 14 हजार रुपये का अर्थदंड पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का भी आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान पिता की हुई थी मौत

सुनवाई के दौरान मामले में नामजद आरोपी के पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके चलते गत छह जून को उनके विरुद्ध न्यायिक कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। अपने फैसले में अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि आरोपी ने पीड़िता से विवाह नहीं किया होता तो क्या मुकदमा स्वतः समाप्त हो जाता? इसका उत्तर स्पष्ट रूप से नहीं है। न्यायालय ने दोहराया कि अपराध के बाद विवाह कर लेना कानून की नजर में अपराध को समाप्त नहीं करता।

लेखक के बारे मेंवैभव पांडेवैभव पांडेय नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर जर्नलिस्ट/असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 18 साल का अनुभव है। वैभव पांडेय ने साल 2018 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। अभी वह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की खबरों पर बारीक नजर रखते हैं। पॉलिटिकल गतिविधियां, सामाजिक सरोकार और अपराध जगत से जुड़ीं खबरें उनकी प्राथमिकता में है। वह यूपी विधानसभा, लोकसभा, पंचायत और नगर निकाय चुनावों के कवरेज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। अच्छे काम की वजह से उन्हें संस्थान की तरफ से सम्मानित भी किया जा चुका है।

विशेषज्ञता- अपराध जगत से जुड़ी खबरों को तहकीकात के साथ पेश करने का खासा अनुभव है। इसके अलावा सियासी उठापटक से जुड़े राजनीतिक विश्लेषण और ओपनियन भी करते रहते हैं।

पत्रकारिता अनुभव: प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 18 साल से कार्यरत

डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद अलग-अलग संस्थानों में काम किया। करियर की शुरुआत लखनऊ में हिदुस्तान समाचार न्यूज एजेंसी से हुई। इसके बाद आगरा के अकिंचन भारत अखबार में काम किया। फिर दिल्ली में देशबंधु और हिंदी डेली आज समाज (इंडिया न्यूज ग्रुप) में कार्यरत रहे। इस दौरान दिल्ली और एनसीआर से जुड़ी खबरों को कवर किया। दैनिक जागरण अखबार के सेंट्रल डेस्क पर लंबे समय तक तैनात रहे। यहां उन्होंने यूपी, उत्तराखंड समेत कई राज्यों की स्पेशल खबरों पर काम किया।... और पढ़ें

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