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सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: ममता बनर्जी ने TMC का नाम‑सिंबल फ्रीज करने के EC फैसले को उलटने की मांगी राहत

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अपने पार्टी के नाम व चिन्ह फ्रीज करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आयोग ने अंतरिम रूप में दोनों दावेदार गुटों को अलग‑अलग नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ व ‘लिफाफा’ जैसे प्रतीक आवंटित किए, जबकि मूल ‘जोड़ा घास फूल’ चिन्ह का प्रयोग प्रतिबंधित किया। वह इस अस्थायी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करतीं और असली पहचान व चिन्ह वापस पाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।

18 सितंबर 2026 को 08:05 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: ममता बनर्जी ने TMC का नाम‑सिंबल फ्रीज करने के EC फैसले को उलटने की मांगी राहत

सौजन्य से:- Hindustan

TMC नाम और सिंबल का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, ममता बनर्जी ने EC के फैसले को दी चुनौती

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नाम और सिंबल फ्रीज करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बता दें कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी को पार्टी का नाम और सिंबल, कुछ भी इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी है।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नाम और सिंबल फ्रीज करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बता दें कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी को पार्टी का नाम और सिंबल, कुछ भी इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी है। आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ जबकि अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। वहीं, ममता बनर्जी ने कहा ने कहा है कि वह अंतरिम व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगी और वह पार्टी की असली पहचान एवं चुनाव चिह्न वापस पाने के लिए संघर्ष करेंगी।

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और अरूप रॉय की अगुवाई वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया। आयोग ने गुरुवार रात जारी अपने अंतरिम आदेश में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (एआईटीसी) को लेकर विवाद में शामिल दोनों पक्षों को निर्देश दिया था कि वे आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और उसके ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करें। आयोग ने उनसे शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न बताने को कहा था।

आयोग ने कहा था कि प्रस्तावित नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से मिलता-जुलता हो सकता है और चुनाव चिह्न निर्दलीय उम्मीदवारों एवं पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए अधिसूचित खाली या उपलब्ध चुनाव चिह्नों की सूची में से चुना जाना चाहिए। पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम एवं मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।

निर्वाचन आयोग ने कहा था कि ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के पैरा 15 के तहत कार्यवाही पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था लेकिन उसने आगामी उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की जरूरत को ध्यान में रखा। आयोग ने कहा था कि यह अंतरिम व्यवस्था खास तौर पर आगामी उपचुनावों के लिए की गई है और यह तब तक लागू रहेगी जब तक कि ‘चुनाव चिह्न आदेश’ के पैरा 15 के तहत विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता।

निर्वाचन आयोग का यह आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल में हुई बगावत के बाद आया है। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता हासिल कर ली, जो 28 साल के इतिहास में पहली बार पार्टी में विभाजन का संकेत था।

इसके पांच दिन बाद यह बगावत संसद तक पहुंच गई। वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सदस्यों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) का दामन थामा और अलग गुट के तौर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन दिया। इससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई।

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