सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर से बागी TMC सांसदों की अयोग्यता पर शीघ्र निर्णय का आग्रह
अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि स्पीकर को निर्धारित समयसीमा के भीतर बागी सांसदों की अयोग्यता पर फैसला देना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने समय सीमा न देने की सलाह दी, पर न्यायाधीशों ने त्वरित समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में कोई निर्देश न देकर सुनवाई स्थगित कर दी गई।

सौजन्य से:- Navbharat Times
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सिर्फ यह मौखिक टिप्पणी की कि लोकसभा स्पीकर से उम्मीद की जाती है कि वह अयोग्यता वाली अर्जी पर जल्द फैसला लें। अभिषेक बनर्जी ने संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है।
अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से इस मामले में समय-सीमा के अंदर फैसला लेने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने यह रिट याचिका डाली है, जिसपर भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में सुनवाई चल रही है।सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी खेमे की दलील
- इस मामले में बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय पेश हुए और कहा कि इस मामले में स्पीकर ने बागी सांसदों को अगस्त में ही नोटिस दे दिया था, लेकिन उन्होंने शुरुआती 14 दिनों में जवाब दाखिल नहीं किया।
- फिर स्पीकर ने जवाब देने की समय-सीमा बढ़ाकर 22 सितंबर कर दी। लेकिन, सांसदों ने और समय देने की मांग की है। कल्याण बंदोपाध्याय ने इसे 'हास्यास्पद' स्थिति बताया है।
- उन्होंने कहा कि जबकि सुप्रीम कोर्ट भी यह कह चुका है कि 10वीं अनुसूची से जुड़े विवादों पर तेजी से विचार किया जाना चाहिए।
- जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि स्पीकर पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं, तो बेंच ने कहा कि एक तय समय-सीमा के भीतर फैसले की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से जल्द फैसले की जताई उम्मीद
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी कहा, 'अथॉरिटी को हम बस 10वीं अनुसूची के बहुत अधिक महत्त्व को ध्यान में रखकर मामले का जल्द समाधान निकालने की याद दिला रहे हैं। हम कोई सख्त निर्देश तो नहीं दे रहे, लेकिन केइशम मेघचंद्र सिंह मामले में आए निर्णय को ध्यान में रखते हुए... इस मुद्दे का जल्द समाधान निकाला जाए।'सॉलिसिटर जनरल को स्पीकर को टाइम-लाइन देने पर आपत्ति
- सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि स्पीकर संवैधानिक कार्रवाई कर रहे हैं और मौजूदा परिस्थितियों में कोर्ट को समय-सीमा नहीं देनी चाहिए।
- इसपर जस्टिस बागची ने कहा, 'हमें नहीं लगता कि इसकी जरूरत पड़नी चाहिए...लेकिन यह अंतिम विकल्प होगा...हमें एक टाइमलाइन चाहिए..।'
सुप्रीम कोर्ट ने बिना निर्देश जारी किए स्थगित की सुनवाई
- तुषार मेहता ने बेंच को यह बताने की कोशिश की कि स्पीकर की ओर से बहुत ज्यादा देरी नहीं हुई है। लेकिन, जस्टिस बागची ने कहा कि 'मिस्टर सॉलिसिटर जनरल, आप अगली बार आएं और हमें एक टाइमलाइन दें।' लेकिन, तुषार मेहता ने कहा कि वह कोई वादा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वह यही आग्रह करेंगे कि स्पीकर के लिए समय फिक्स नहीं किया जाए।
- अंत में बेंच ने कोई निर्देश जारी किए बिना ही सुनवाई स्थगित कर दी और टीएमसी के बागी सांसदों की ओर से अदालत को यह बताया गया कि वे चार हफ्ते के भीतर स्पीकर के सामने अपना जवाब दाखिल कर देंगे।
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