सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से एसिड बिक्री पर पूर्ण रोक या कड़े नियमों पर निर्णय मांगें
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या दुकानों में एसिड की खुदरा बिक्री पर पूरी रोक लगाई जाए या कड़े नियमन के तहत नियंत्रित किया जाए। कोर्ट ने राज्यों को एसिड हमले के पीड़ितों के लिए पुनर्वास योजनाएँ बनाने का भी निर्देश दिया, और 2013 के दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर चिंता जताई।

सौजन्य से:- jagran.com
क्या अब दुकानों पर नहीं मिलेगा एसिड? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या एसिड की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाए या कड़े नियम बनाए जाएं।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की खुदरा बिक्री पर केंद्र से जवाब मांगा।
- राज्यों को एसिड पीड़ितों के लिए पुनर्वास योजनाएं बनाने का निर्देश।
- 2013 के नियमों का पालन न होने पर कोर्ट ने चिंता जताई।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से इस बारे में जवाब मांगा है कि क्या एसिड की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जानी चाहिए या उसे कड़े नियमों के दायरे में लाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने ये निर्देश तब दिये जब 2013 में एसिड की रिटेल बिक्री को नियंत्रित किये जाने के निर्देश के बावजूद एसिड आसानी से उपलब्ध होने पर चिंता जताई गई। और कोर्ट से एसिड की खुदरा बिक्री पर रोक लगाए जाने की मांग की गई।
शीर्ष अदालत ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशो को निर्देश दिया है कि वे एसिड हमले की पीड़ितों के लिए पुनर्वास योजनाएँ तैयार करें और छह सप्ताह के भीतर रिकार्ड पर पेश करें। ये निर्देश सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एसिड हमले की पीडि़ता शाहीन मलिक की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिये।
पीठ ने कहा कि उसे बताया गया है कि 2013 में एसिड की खुदरा बिक्री के बारे में कुछ दिशा निर्देश तय किये गए थे, जो लगभग अप्रचलित हो चुके हैं और उनका पालन नहीं किया जा रहा है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि केंद्र सरकार एसिड की खुदरा बिक्री के सख्त नियमन को सुनिश्चित करने के लिए एक योजना बनाने पर विचार करे। कोर्ट ने कहा कि केंद्र को यह भी बताना होगा कि एसिड की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लगाई जानी चाहिए। या फिर ऐसी बिक्री को कड़े रेगुलेटरी नियमों के साथ करने की इजाजत दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि जिन राज्य सरकारों ने नियम नहीं बनाए हैं वे नियम बनाएं। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे एसिड हमले की घटनाओं के बारे में भी जानकारी दें। यह भी बताएं कि क्या उन मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है या नहीं, और कितने मामले अभी भी ट्रायल या अपील के स्तर पर लंबित हैं।
याचिकाकर्ता शाहीन मलिक ने एसिड की बिक्री पर रोक लगाने की मांग वाली एक नई अर्जी भी दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया। एसिड की रिटेल बिक्री पर रोक लगाने का मुद्दा पुनर्वास के मुद्दे से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। रोजाना एसिड अटैक की तीन घटनाएं होती हैं। 2013 के दिशा-निर्देश हैं लेकिन उनका अनुपालन नहीं हो रहा।
इस दाखिल अर्जी में एसिड की खुदरा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई है जबकि औद्योगिक बिक्री जारी रह सकती है। पीठ ने कहा कि अदालत इस बारे में केंद्र सरकार के विचार जानना चाहेगी कि एसिड का निर्माण कैसे होता है और बाजार में आसानी से उपलब्ध कैसे रहता है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि लक्ष्मी बनाम भारत संघ मामले में कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्र सरकार ने परामर्श जारी कर आदर्श नियम बनाए, जिन्हें राज्य सरकारों को भेजा था। हालांकि राज्यों ने न तो समितियां गठित कीं और न ही नियम लागू किए।
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