टुर्कमेनिस्तानी महिला की होटल हत्या पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश: SIT को 60 दिनों में पूरी रिपोर्ट
परतापुर के अविका होटल में हुई हत्या में मृतका की पहचान और अंतिम संस्कार में गंभीर चूक हुई, जिसकी सूचना माँ और तुर्कमेनिस्तान दूतावास को नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए, जांच एजेंटों के खिलाफ विभागीय जांच और SIT को दो महीने में संपूर्ण जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
17 फरवरी, 2026 को परतापुर के रिठानी स्थित अविका होटल में मुहब्बत की हत्या किए जाने का आरोप है। वारदात के बाद शव को मवाना थाना क्षेत्र में ले जाकर फेंक दिया गया। 21 फरवरी को पुलिस ने महिला का शव बरामद किया। शुरुआत में उसकी पहचान नहीं हो सकी। पुलिस ने 26 फरवरी को एक फर्जी पहचान पत्र के आधार पर उसे दिल्ली निवासी अर्चिता अरोड़ा मानते हुए हत्याकांड का खुलासा कर दिया।
रुपयों को लेकर हुआ था विवाद
मामले में होटल संचालक देवपुरी निवासी चंचल कुमार उर्फ बंटी, बागपत के जौहड़ी निवासी गुरमुख, प्रभात नगर निवासी संदीप और मलियाना की खजूरीवाली गली निवासी विवेक को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, रुपये के लेनदेन को लेकर चंचल का मुहब्बत से विवाद हुआ था। आरोप है कि आरोपियों ने कंबल से मुंह दबाकर उसकी हत्या की और होटल के सीसीटीवी फुटेज समेत साक्ष्य नष्ट कर दिए। हालांकि जांच में ठोस साक्ष्य सामने न आने के कारण आरोपियों को बाद में जमानत मिल गई।
चूड़ी और धागा देखकर मान लिया हिंदू, कर दिया अंतिम संस्कार
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू शव की पहचान और अंतिम संस्कार से जुड़ा है। मवाना पुलिस ने मृतका की पहचान न होने पर उसके हाथ की चूड़ी और गले में बंधे धागे के आधार पर उसे हिंदू मान लिया। इसके बाद सूरजकुंड श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मां तक को नहीं दी गई खबर
सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि पुलिस ने न तो मृतका के परिजनों को सूचना दी और न ही तुर्कमेनिस्तान के दूतावास को इसकी जानकारी दी। बाद में मीडिया और दूतावास के सहयोग से पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ी। मृतका की मां ने उसके इयर रिंग्स देखकर पहचान की, जबकि बाद में डीएनए जांच से भी उसकी पहचान की पुष्टि हुई। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अंतिम संस्कार के बाद राख तक सुरक्षित नहीं रखी गई। इससे मां को अपनी बेटी के अवशेष अपने साथ ले जाने का अवसर भी नहीं मिल सका।
FIR में देरी और पोस्टमार्टम पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट के अनुसार, शव पर चोट और जलने के निशान मौजूद थे, फिर भी मृत्यु के कारण से जुड़े साक्ष्य जुटाने की पर्याप्त कोशिश नहीं की गई। एफआईआर दर्ज करने में देरी का भी कोई उचित कारण सामने नहीं आया। कोर्ट ने पोस्टमार्टम चार दिन तक टाले जाने पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की लापरवाही इस बात से भी स्पष्ट होती है कि अंतिम संस्कार के बाद राख को सुरक्षित रखने तक की व्यवस्था नहीं की गई।
SIT अब खंगालेगी होटल से जुड़े पूरे नेटवर्क को
मामले में सामने आई वॉट्सऐप चैट के कुछ स्क्रीनशॉट ने भी जांच को नया कोण दिया था। इनमें विदेशी लड़कियों और महिलाओं को उपलब्ध कराने से संबंधित बातचीत सामने आने का दावा किया गया था। इसके बाद आरोपियों के किसी बड़े अनैतिक धंधे या मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई गई। अब SIT की जांच में यह भी देखा जाएगा कि मुहब्बत की हत्या केवल रुपये के विवाद का परिणाम थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। विदेशी महिलाओं को नौकरी आदि के नाम पर बुलाने, उनकी गतिविधियों और होटल से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।
पुलिस अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही मृतका के अवशेष उसकी मां को सौंपने और उन्हें तुर्कमेनिस्तान वापस ले जाने में विदेश मंत्रालय तथा दूतावास को आवश्यक सहायता देने का आदेश दिया है। एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने सुनवाई के दौरान ही मवाना थाना प्रभारी पूनम जादौन और उप निरीक्षक प्रीति शर्मा के खिलाफ जांच शुरू करा दी थी। इस मामले में 25 फरवरी को एफआईआर दर्ज हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट याचिका के बाद होटल में लगी भीषण आग
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वरुण नारंग ने होटल में लगी आग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 12 सितंबर को अविका होटल में भीषण आग लगी, जिससे होटल को काफी नुकसान हुआ। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहन मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के SIT जांच के आदेश के बाद इस मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है।
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