सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के राज्य गान के स्वर और समय पर हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले को न बदलने का निर्णय लिया, जिसमें राज्य गान 'जयभारत जननीय तनुजाते' की धुन और ढाई मिनट की अवधि तय की गई थी। न्यायाधिकरण ने गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति की अपील खारिज कर दी और गान में राग एवं अवधि की एकरूपता पर जोर दिया।

सौजन्य से:- Jagran
कर्नाटक के राज्य गान की धुन और समय पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार किया, जिसमें राज्य गान 'जयभारत जननीय ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में दखल से इनकार किया।
- राज्य गान 'जयभारत जननीय तनुजाते' की धुन और समय तय।
- शीर्ष अदालत ने गान में एकरूपता पर जोर दिया।
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया है, जिसमें उसने राज्य गान 'जयभारत जननीय तनुजाते' के गायन के लिए एक खास धुन और समय तय करने के प्रदेश सरकार के फैसले को बरकरार रखा था।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति की अपील खारिज कर दी।
उन्होंने हाई कोर्ट के पांच जनवरी, 2026 के फैसले को चुनौती दी थी। इसमें उसने राज्य सरकार का 25 सितंबर, 2022 का आदेश रद करने से इनकार कर दिया था। इसमें कहा गया था कि राज्य गान को मैसूर अनंतस्वामी द्वारा बनाई गई धुन में ढाई मिनट में गाया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, हमारा मानना है कि राज्य गान को गाने में राग और गायन की अवधि, दोनों के मामले में एकरूपता होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रदेश सरकार को राज्य गान के लिए राग तय करने का अधिकार है, खासकर तब जबकि इसे किसी विशेषज्ञ ने तैयार किया हो।
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