बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनएमसी अधिकारियों को फटकारा: SC के बुलडोजर आदेश के बारे में न जाने का दावा पर आश्चर्य
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने यह जानकर हैरानी जताई कि एनएमसी के अधिकारी, जिनमें एक IAS कमिश्नर भी शामिल हैं, सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर फैसले से अनभिज्ञ थे, जबकि आम लोग इसके बारे में जानते हैं। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और रजनीश व्यास ने उन्हें 4 सितंबर से पहले अलग-अलग हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें वे अपनी पिछली स्थिति स्पष्ट करें। इस केस में महल दंगे के मुख्य आरोपी से संबंधित संपत्ति पर निर्णय और 15‑दिन नोटिस के तहत अनधिकृत निर्माणों को गिराने के निर्देशों पर चर्चा हुई।

सौजन्य से:- Jagran
'SC के बुलडोजर आदेश के बारे में आम इंसान को भी पता है', बॉम्बे हाई कोर्ट ने IAS अधिकारी को लगाई फटकार
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर फैसले की जानकारी न होने का दावा करने पर एनएमसी अधिकारियों को फटकार लगाई।
HighLights
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनएमसी अधिकारियों को फटकारा।
- सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर फैसले की जानकारी न होने पर हैरानी।
- अधिकारियों को 4 सितंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC) के अधिकारियों के इस दावे पर हैरानी जताई है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर फैसले के बारे में जानकारी नहीं थी।
कोर्ट ने कहा कि एक आम आदमी भी इसके बारे में जानता है, लेकिन एनएमसी के अधिकारियों को इसके बारे में पता नहीं है। इसमें एक आईएएस अधिकारी (एनएमसी कमिश्नर) भी शामिल हैं।
कोर्ट ने अधिकारियों को दिया निर्देश
जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस रजनीश व्यास की बेंच ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 4 सितंबर से पहले अलग-अलग हलफनामे (affidavits) दाखिल करें। इसमें उन्हें यह बताना होगा कि क्या वे अपनी पिछली सफाई पर कायम हैं या कोई स्पष्टीकरण देना चाहते हैं।
क्या है मामला?
अदालत महल दंगा मामले के मुख्य आरोपी फहीम खान की 69 वर्षीय मां मेहरुन्निसा शमीम खान और अब्दुल हफीज (96) द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अब्दुल हफीज की संपत्ति का कुछ हिस्सा इसलिए गिरा दिया गया था क्योंकि उनका एक रिश्तेदार महल दंगे का आरोपी था।
बेंच के सामने मुख्य मुद्दा यह था कि नगर निकाय ने नोटिस जारी करने के बाद किस तरह और कितनी तेजी से तोड़-फोड़ की कार्रवाई की। 10 जुलाई को कोर्ट ने एनएमसी को रिकॉर्ड पर यह जानकारी देने का निर्देश दिया था कि पिछले 10 सालों में कितनी बार उसने इतनी ही तेजी दिखाई और नोटिस की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद अनधिकृत या अवैध निर्माणों को गिराया।
नगर निकाय ने माना कि उसके आधिकारिक डेटा में पिछले 10 सालों में ऐसा कोई मामला नहीं मिला, जिसमें नोटिस की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद ऐसी कार्रवाई की गई हो। जजों ने दूसरे मामलों में कोर्ट के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि एक दशक से ज्यादा समय से निर्देश दिए जाने के बावजूद एनएमसी ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
उन्होंने सिविक बॉडी से 13 नवंबर, 2024 को आए बुलडोजर फैसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के बारे में सवाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि किसी भी ढांचे को गिराने से पहले अधिकारियों को 15 दिन का नोटिस देना होगा। यह नियम तब भी लागू होगा जब किसी कानून में कम समय का नोटिस (जैसे 24 घंटे का नोटिस) देने की इजाजत हो।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुपौल में 12 सितंबर को लोक अदालत, 16,600 ट्रैफ़िक‑परिवहन मामलों का त्वरित निपटारा, 90‑दिन पुराने चालानों पर 50% तक राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शरिया कोर्ट के आदेश को कानूनी मान्यता नहीं दी

हरी झंडी दिखाकर शुरू, 12 सितंबर को हमीरपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

लखनऊ की पुलिस‑कानूनी सेवा मिलकर लोक अदालत का प्रचार करेंगे गांव-गांव

सर्वर त्रुटि 500: अस्थायी व्यवधान

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल एवं कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाई: बिना आरटीई, एनसीटीई, यूजीसी योग्यता के नहीं होंगे

सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें

500 सर्वर त्रुटि: अस्थायी समस्या
ताज़ा ख़बरें
- सर्वर त्रुटि 500: बाद में पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – कृपया बाद में पुनः प्रयास करें
- सर्वर पर 500 त्रुटि: पृष्ठ लोड नहीं हो पाया
- 500 सर्वर त्रुटि – पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500: पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – अस्थायी समस्या, कृपया पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – अस्थायी समस्या
- राष्ट्रीय लोक अदालत: महराजगंज में मामलों के तेज निपटारे की पहल

