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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की है। अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता संविधान संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित निर्णयों के मद्देनजर अपने तर्क साबित करने में असफल रहे हैं।

31 जुलाई 2026 को 08:15 pm बजे
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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एपीओ भर्ती : आरक्षण को लेकर याचिका खारिज:कोट्र ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर तर्क साबित करने में असफल

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में लागू आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता संविधान संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित निर्णयों के मद्देनजर अपने तर्क साबित करने में असफल रहे हैं। यह आदेश न्यायमूर्

अभ्यर्थियों ने दाखिल की थी याचिका

यह याचिका एपीओ भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने दाखिल की थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 की धारा 3(2), 3(5) और 3(6), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आरक्षण अधिनियम, 2020 की धारा 3(6) तथा वर्ष 1999 के दो शासनादेशों की वैधता को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि रोस्टर प्रणाली के कारण आरक्षण का प्रतिशत 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो रहा है।

यूपी सरकार ने जवाब दिया

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 1994 अधिनियम की संबंधित धाराएं संविधान के 81वें संशोधन और अनुच्छेद 16(4-बी) के अनुरूप हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट ऑफ यूपी बनाम संगम नाथ पांडे मामले में भी रोस्टर प्रणाली से जुड़े प्रावधानों को स्वीकार किया है।

अदालत ने याचिका खारिज की

खंडपीठ ने राज्य सरकार के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता संविधान संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के बाद के निर्णयों के प्रभाव को चुनौती नहीं दे सके। इसलिए अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। याची का कहना था कि कुल 182सीट में से सामान्य वर्ग के लिए 27सीट रखी गई है।जो सुप्रीम कोर्ट के 50फीसदी से अधिक आरक्षण न देने के फैसले का उल्लघंन है। कोर्ट ने कहा इसका जवाब इंद्रा साहनी केस के छठे प्रश्न में दिया गया है।

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