तहसीलदार को लाल बत्ती का रौब दिखाना पड़ा भारी, अदालत पहुंचा मामला; अब नोटिस का देना होगा जवाब - notice issued to tehsildar for flaunting red beacon authority
तहसीलदार को लाल बत्ती का रौब दिखाना पड़ा भारी, अदालत पहुंचा मामला; अब नोटिस का देना होगा जवाब सोपोर के तहसीलदार तारिक अहमद शेख को सरकारी गाड़ी पर लाल बत्ती और प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने पर कश्मीर की एक अदालत ने कारण ब…
सौजन्य से:- Jagran
तहसीलदार को लाल बत्ती का रौब दिखाना पड़ा भारी, अदालत पहुंचा मामला; अब नोटिस का देना होगा जवाब
सोपोर के तहसीलदार तारिक अहमद शेख को सरकारी गाड़ी पर लाल बत्ती और प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने पर कश्मीर की एक अदालत ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
HighLights
- सोपोर तहसीलदार को लाल बत्ती के लिए नोटिस
- सरकारी गाड़ी पर वीआईपी संस्कृति दिखाने का आरोप
- कोर्ट ने वाहन जांच और कार्रवाई का आदेश दिया
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। सरकारी गाड़ी पर लाल बत्ती और प्रेशर हॉर्न लगाकर वीआईपी रौब दिखाना सोपोर के तहसीलदार तारिक अहमद शेख को महंगा पड़ गया है। कश्मीर की एक अदालत ने इस मामले में तहसीलदार को शो-कॉज नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) शब्बीर अहमद मलिक ने यह आदेश मुजफ्फर अहमद की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट सज्जाद मोही-उद-दीन और हारून राशिद पेश हुए। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर पेश किए गए सबूत और आवेदन की जांच के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और तथ्यों की जांच जरूरी है।
कोर्ट ने एसएसपी ट्रैफिक रूरल कश्मीर को निर्देश दिया है कि वह तहसीलदार सोपोर की सरकारी गाड़ी का मौके पर जाकर फिजिकल इंस्पेक्शन करें और देखें कि क्या गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती और मल्टी-टोन सायरन लगा है या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर अनधिकृत बीकन या सायरन मिला तो उसे तुरंत जब्त किया जाए और मोटर व्हीकल एक्ट 1988, सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 के तहत कार्रवाई की जाए।
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आवेदक का आरोप है कि तहसीलदार अपनी सरकारी गाड़ी पर नियमों का उल्लंघन कर लाल बत्ती/वार्निंग लाइट और कई टोन वाला सायरन इस्तेमाल कर रहे हैं। आरोप को साबित करने के लिए फेसबुक वीडियो का लिंक और स्क्रीनशॉट भी पेश किए गए, जिसमें तहसीलदार अपनी सरकारी गाड़ी में बैठकर मीडिया को इंटरव्यू दे रहे हैं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले अभय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार का भी हवाला दिया गया, जिसमें कोर्ट ने वीआईपी कल्चर पर रोक और कानून के राज को बनाए रखने के लिए अफसरों द्वारा बत्ती के अंधाधुंध इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी, जिसमें तय होगा कि तहसीलदार साहब की लाल बत्ती का शौक उन पर कानूनी कार्रवाई की वजह बनता है या नहीं।
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