सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की ट्रस्टीशिप को पहली नज़र में वसीयत के ज़रिए किसी और को नहीं सौंपा जा सकता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट का कोई ट्रस्टी, पहली नज़र में, अपनी वसीयत के ज़रिए अपने पद के लिए किसी उत्तराधिकारी को नियुक्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि ट्रस्टीशिप विश्वास का एक व्यक्तिगत पद है, जो विरासत में नहीं मिलता। साथ ही किसी पब्लिक ट्रस्ट का प्रबंधन "पारिवारिक या वंशानुगत अधिकार" नहीं बन सकता। जस्टिस दीपक गुप्ता ने फरीदाबाद के 'जनहित सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा दायर एक रिवीजन याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। जब तक कि इस मामले का फैसला नहीं हो जाता, कोर्ट ने एक दिवंगत 'लाइफ ट्रस्टी'

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट का कोई ट्रस्टी, पहली नज़र में, अपनी वसीयत के ज़रिए अपने पद के लिए किसी उत्तराधिकारी को नियुक्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि ट्रस्टीशिप विश्वास का एक व्यक्तिगत पद है, जो विरासत में नहीं मिलता। साथ ही किसी पब्लिक ट्रस्ट का प्रबंधन "पारिवारिक या वंशानुगत अधिकार" नहीं बन सकता। जस्टिस दीपक गुप्ता ने फरीदाबाद के 'जनहित सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा दायर एक रिवीजन याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। जब तक कि इस मामले का फैसला नहीं हो जाता, कोर्ट ने एक दिवंगत 'लाइफ ट्रस्टी'
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