रेलवे पटरियों पर स्टंट करते युवक की मृत्यु पर हाई कोर्ट ने मुआवजा दावा खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुशीला द्वारा दायर रेलवे मुआवजा याचिका को खारिज कर दिया क्योंकि उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि मृतक ट्रेन का यात्री था। चश्मदीद गवाह और आरपीएफ रिपोर्ट दोनों ने बताया कि वह पटरियों के बीच स्टंट कर रहा था और एक एक्सप्रेस ट्रेन से टकरा गया। इस कारण अदालत ने दावे को अस्वीकृत किया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुशीला की रेलवे मुआवजा अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सबूत युवक के यात्री होने की पुष्टि नहीं करते। चश्मदीद और RPF रिपोर्ट के मुताबिक भरत रेलवे पटरियों के बीच स्टंट कर रहा था, तभी नांगलोई की ओर से आई ट्रेन ने टक्कर मार दी।
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने रेलवे मुआवजे का दावा खारिज करते हुए अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूत युवक के पैसेंजर ट्रेन से गिरने की कहानी का समर्थन नहीं करते। रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह रेलवे पटरियों के बीच स्टंट कर रहा था। इसी दौरान एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आ गया। जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने सुशीला की अपील खारिज कर दी। उन्होंने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के मई 2016 के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने चश्मदीद संदीप के बयान को अहम माना। संदीप ने युवक को रेलवे लाइन के बीच खड़े होकर अजीब हरकतें (स्टंट) करते हुए देखा था। उसने बताया कि दो अन्य लड़के प्लेटफॉर्म पर थे। युवक पटरियों के बीच ही रहा। इसी दौरान नांगलोई की ओर से आ रही एक्सप्रेस ट्रेन ने उसे टक्कर मार दी।
RPF रिपोर्ट से भी हुई पुष्टि
कोर्ट ने कहा कि चश्मदीद के बयान की पुष्टि RPF की रिपोर्ट से भी होती है। थाना शकूरबस्ती के इंस्पेक्टर इंचार्ज की रिपोर्ट में दर्ज था कि युवक पटरियों के बीच स्टंट कर रहा था। तभी ट्रेन नंबर 12482 वहां से गुजरी।
कोर्ट को यात्री होने का नहीं मिला सबूत
कोर्ट ने कहा कि केवल टिकट पेश नहीं कर पाने से मुआवजे का दावा खारिज नहीं होता। लेकिन दावेदार को यह साबित करना जरूरी है कि मृतक संबंधित ट्रेन का यात्री था। कोर्ट ने कहा कि मामले में ऐसा कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला। इसके उलट रिकॉर्ड से युवक के पटरियों पर होने की बात सामने आती है।
युवक उसकी चपेट में आ गया
कोर्ट ने उस पैसेंजर ट्रेन के ड्राइवर और गार्ड के बयान भी देखे। परिवार का दावा था कि भरत इसी ट्रेन से यात्रा कर रहा था। लेकिन ड्राइवर और गार्ड ने कहा कि उस दिन ट्रेन में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। उन्हें ऐसी किसी घटना की सूचना भी नहीं मिली थी।
लेखक के बारे मेंप्राची यादवलगभग 19 साल से पत्रकारिता में हैं। सात साल तक एक दिल्ली-एनसीआर न्यूज चैनल में विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। प्रोग्रामिंग और एंकरिंग भी की। टीवी से ही लीगल रिपोर्टिंग की शुरुआत हुई। उस दौरान, जिला अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक की रिपोर्टिंग की। 2013 में नवभारत टाइम्स से जुड़ीं। यहां पर शुरुआत जिला अदालतों, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की रिपोर्टिंग से हुई। वर्तमान में अन्य सभी अदालतों के साथ दिल्ली हाई कोर्ट भी कवर कर रही हैं।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Legalकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुपौल में 12 सितंबर को लोक अदालत, 16,600 ट्रैफ़िक‑परिवहन मामलों का त्वरित निपटारा, 90‑दिन पुराने चालानों पर 50% तक राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शरिया कोर्ट के आदेश को कानूनी मान्यता नहीं दी

हरी झंडी दिखाकर शुरू, 12 सितंबर को हमीरपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

लखनऊ की पुलिस‑कानूनी सेवा मिलकर लोक अदालत का प्रचार करेंगे गांव-गांव

सर्वर त्रुटि 500: अस्थायी व्यवधान

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल एवं कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाई: बिना आरटीई, एनसीटीई, यूजीसी योग्यता के नहीं होंगे

सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें

500 सर्वर त्रुटि: अस्थायी समस्या
ताज़ा ख़बरें
- सर्वर त्रुटि 500: बाद में पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – कृपया बाद में पुनः प्रयास करें
- सर्वर पर 500 त्रुटि: पृष्ठ लोड नहीं हो पाया
- 500 सर्वर त्रुटि – पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500: पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – अस्थायी समस्या, कृपया पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – अस्थायी समस्या
- राष्ट्रीय लोक अदालत: महराजगंज में मामलों के तेज निपटारे की पहल

