किसान मनमेरा गोंड की 8‑वर्षीय संघर्ष से मिला मुआवजा, बिलासपुर हाईकोर्ट ने आदेश दिया
बिलासपुर जिले के किसान मनमेरा गोंड ने रायपुर‑बिलासपुर बायपास के निर्माण से प्रभावित अपनी 72 डिसमिल भूमि के मुआवजे के लिये आठ वर्षों तक अदालत में मुकदमा दायर किया। 31 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने निरीक्षण एवं सीमांकन के बाद 60 दिन के भीतर मुआवजा भुगतान का निर्देश दिया, पर अनुपालन में देरी से अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई। 25 अगस्त 2026 को न्यायालय ने एनएचएआई तथा संबंधित अधिकारी को छह माह के भीतर अधिग्रहण और भुगतान पूरी करने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
हक के लिए आठ साल किसान ने लड़ी कानूनी लड़ाई, जमीन अधिग्रहण के बाद भी नहीं मिला था मुआवजा,बिलासपुर हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश
बिलासपुर रायपुर राजमार्ग में जमीन जाने के बाद भी किसान को मुआवजा नहीं मिला.इस पर आठ साल बाद बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला आया है.
By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : September 1, 2026 at 1:48 PM IST
बिलासपुर: हाईकोर्ट ने एनएचएआई को 72 डिसमिल भूमि का अधिग्रहण कर प्रार्थी को मुआवजा देने का निर्देश दिया है. पहली याचिका पर हाईकोर्ट ने निरीक्षण, सीमांकन और मुआवजा प्रक्रिया के लिए 60 दिन की समय-सीमा तय की थी. अनुपालन में देरी के बाद मामला अवमानना तक पहुंचा. अब ताजा आदेश में अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कर मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए छह माह की समय-सीमा तय की गई है.
कहां का है मामला ?
बिलासपुर जिले के ग्राम मुड़िपार निवासी किसान मनमेरा गोंड ने अपनी जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. मुआवजे के लिए किसान ने लगभग आठ वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी. रायपुर–बिलासपुर बायपास के निर्माण से किसान की भूमि प्रभावित हुई थी. जिस जमीन पर कभी गन्ने की फसल लहलहाती थी, वहां अब चमचमाती सड़क बन चुकी है.लेकिन भूमि अधिग्रहण के बाद भी प्रभावित किसान को मुआवजा मिलने में देरी हुई.
पहली याचिका पर हाईकोर्ट ने दिए थे स्पष्ट निर्देश
31 जनवरी 2025 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मनमेरा गोंड द्वारा दायर पहली याचिका पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे.न्यायालय के समक्ष ये तथ्य रखा गया था कि खसरा नंबर 411 एवं 451/5 की भूमि के कुछ हिस्से का उपयोग बायपास निर्माण में किया गया है, लेकिन एनएचएआई की ओर से उसका मुआवजा भुगतान नहीं किया गया है. हाईकोर्ट ने संबंधित भूमि अधिग्रहण अधिकारी-सह-अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बिलासपुर को मामले की जांच करने के निर्देश दिए थे. इसके तहत मौके का निरीक्षण एवं भूमि का सीमांकन किया जाना था.
जांच में सच मिली शिकायत
न्यायालय ने विशेष रूप से निर्देश दिया था कि यदि जांच में यह स्थापित होता है कि याचिकाकर्ता की भूमि का उपयोग बायपास निर्माण के लिए किया गया है, तो कानून के अनुसार मुआवजा भुगतान के लिए आवश्यक कार्रवाई 60 दिनों के भीतर की जाए. हाईकोर्ट के पहले आदेश के बाद सीमांकन की कार्रवाई की गई और यह सामने आया कि किसान की भूमि बायपास सड़क से प्रभावित हुई है. इसके बावजूद भूमि के औपचारिक अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी.
आदेश के पूर्ण अनुपालन में हुई देरी के कारण ग्राम मुड़िपार निवासी किसान मनमेरा गोंड को दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा और अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी.
NHAI ने भूमिअधिग्रहण और मुआवजा देने के लिए लिखा था पत्र
अवमानना की कार्यवाही के दौरान यह तथ्य सामने आया कि सीमांकन से यह स्पष्ट हो चुका है कि किसान की भूमि एनएचएआई निर्मित बायपास सड़क से प्रभावित है.यह भी सामने आया कि एनएचएआई ने संबंधित राजस्व अधिकारी को पत्र लिखकर प्रभावित भूमि का राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत अधिग्रहण करने एवं कानून के अनुसार मुआवजा भुगतान की कार्रवाई करने का अनुरोध किया था.
अवमानना याचिका के बाद हाईकोर्ट का नया निर्देश
25 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने संबंधित एसडीओ (राजस्व) को विषयगत भूमि के अधिग्रहण की कार्यवाही राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत प्रारंभ करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट ने एनएचएआई को भी किसान मनमेरा गोंड को देय मुआवजे का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. न्यायालय ने निर्देशित किया कि पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार, अधिमानतः छह माह के भीतर पूरी की जाए.इन निर्देशों के बाद न्यायालय ने माना कि अवमानना की कार्यवाही को आगे जारी रखने का अब कोई कारण नहीं है और अवमानना प्रकरण को समाप्त कर दिया गया.
आठ साल बाद मिला किसान को हक
मामले की शुरुआत पहली रिट याचिका से हुई, जिसमें हाईकोर्ट ने निरीक्षण और सीमांकन के बाद कानून के अनुसार मुआवजे की कार्रवाई के लिए 60 दिन का निर्देश दिया.आदेश के अनुपालन में देरी हुई तो मामला अवमानना कार्यवाही तक पहुंचा. अब ताजा आदेश में हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने और किसान को देय मुआवजा दिलाने की दिशा में निर्णायक निर्देश जारी किए हैं.एक तरफ विकास के लिए बनाई गई सड़क किसान की भूमि पर खड़ी हो गई, तो दूसरी तरफ किसान अपने हक के लिए न्यायालय की चौखट पर डटा रहा.
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