तमिलनाडु सरकार ने SC में याचिका दायर की: मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक की मांग
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है, जिसमें मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर 'कार्तिगै दीपम' जलाने की अनुमति दी गई थी. सरकार ने कहा है कि पारंपरिक दीपक जलाने से पहाड़ी की नाजुक चट्टानी गुफाओं और शिलालेखों को नुकसान हो सकता है.

सौजन्य से:- The Wire - Hindi
नई दिल्ली: तमिलनाडु में नई बनी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है, जिसमें मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर सिकंदर बादुशा दरगाह के पास ‘कार्तिगै दीपम’ जलाने की अनुमति दी गई थी.
राज्य सरकार की याचिका हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के 6 जनवरी के आदेश को चुनौती देती है. मदुरै पीठ ने एक सिंगल जज के 1 दिसंबर, 2025 के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें त्योहार के दिन पारंपरिक दीपक जलाने के निर्देश दिए गए थे.
ज्ञात हो कि यह पहाड़ी, जहां तीन मंदिर, एक दरगाह और प्राचीन जैन गुफाएं हैं, लंबे समय से एक साझा स्थल रही है, जहां अलग-अलग समुदाय साथ-साथ पूजा करते आए हैं.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु सरकार के वकील बी. करुणाकरण ने कहा कि यह पहाड़ी ‘प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम’ के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक है.
करुणाकरण ने कहा कि पहाड़ी पर मौजूद नाजुक चट्टानी गुफाओं को दीपक जलाने से नुकसान हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इससे शिलालेखों और प्राकृतिक भू-भाग को और नुकसान हो सकता है, साथ ही भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.
राज्य सरकार की याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने विरासत, पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया. तमिलनाडु सरकार अपील के निपटारे तक हाईकोर्ट के निर्देश पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग कर रही है.
हर साल कार्तिगै दीपम के मौके पर मदुरै जिले के तिरुप्परनकुंद्रम में अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के पीछे स्थित छोटी पहाड़ी पर तमिल हिंदू दीपक जलाते हैं. यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है.
लेकिन पिछले साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), हिंदू मुन्नानी और भाजपा के पदाधिकारियों सहित दक्षिणपंथी समूहों ने मांग की थी कि दीपक पारंपरिक स्थान (उची पिल्लैयार मंदिर के पास) पर नहीं, बल्कि उसी पहाड़ी पर हज़रत सुल्तान सिकंदर बादशाह औलिया दरगाह के बगल में स्थित एक खंभे पर जलाया जाए.
तिरुप्परनकुंद्रम में सिकंदर दरगाह की मौजूदगी लंबे समय से दक्षिणपंथी समूहों द्वारा धार्मिक तनाव पैदा करने की कोशिशों का केंद्र रही है. इस मंदिर को लेकर कानूनी विवाद 19वीं सदी की शुरुआत से चल रहा है.
पिछले साल दिसंबर में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के नेतृत्व वाली तत्कालीन तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट की मदुरै पीठ को बताया था कि तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर मौजूद पत्थर का खंभा जैन समुदाय ने स्थापित किया था और वह हिंदुओं का नहीं था.
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