सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से वृद्धाश्रमों व वरिष्ठ नागरिक सुविधाओं पर नई स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने एक 2016 की लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्यों को वृद्धाश्रमों और वरिष्ठ नागरिकों के लिये उपलब्ध सुविधाओं की ताज़ा स्थिति रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया, ताकि उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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सुप्रीम कोर्ट: वृद्धाश्रमों और वरिष्ठ नागरिकों की सुविधाओं पर सर्वोच्च अदालत चिंतित, राज्यों से मांगी रिपोर्ट
Mon, 07 Sep 2026 04:22 PM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, अमर उजाला
पीटीआई, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 07 Sep 2026 04:22 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्यों से वृद्धाश्रमों और वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। शीर्ष अदालत 2016 में दायर एक लंबे समय से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में बुजुर्गों के कल्याण और संरक्षण के लिए उठाए गए उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की गई है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने डॉ. अश्विनी कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कुमार ने प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रमों की स्थापना, वरिष्ठ नागरिकों के लिए पर्याप्त पेंशन और उनकी देखभाल से संबंधित निर्देशों को लागू करने की मांग की है।
केंद्र की मांग- मामले को संबंधित उच्च न्यायालयों में ट्रांसफर कर दिया जाए
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि करोड़ों बुजुर्गों के अधिकारों और कल्याण से जुड़े मुद्दों के कारण यह मामला वर्षों से सुना नहीं गया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शीर्ष अदालत व्यापक सिद्धांत तय कर सकती है, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालयों से कहा जा सकता है। केंद्र ने सुझाव दिया कि मामले को संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया जाए। हालांकि, पीठ ने पहले सभी राज्यों से वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगने का फैसला किया।
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पीठ ने कहा कि सभी राज्यों को उनके महाधिवक्ताओं द्वारा पत्र प्राप्त किए जाने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। यह जनहित याचिका 2016 से शीर्ष अदालत में लंबित है और इसमें बुजुर्गों के लिए कानूनी तथा संवैधानिक सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन का मुद्दा उठाया गया है।
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याचिका में क्या मांग की गई है?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने डॉ. अश्विनी कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कुमार ने प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रमों की स्थापना, वरिष्ठ नागरिकों के लिए पर्याप्त पेंशन और उनकी देखभाल से संबंधित निर्देशों को लागू करने की मांग की है।
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केंद्र की मांग- मामले को संबंधित उच्च न्यायालयों में ट्रांसफर कर दिया जाए
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि करोड़ों बुजुर्गों के अधिकारों और कल्याण से जुड़े मुद्दों के कारण यह मामला वर्षों से सुना नहीं गया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शीर्ष अदालत व्यापक सिद्धांत तय कर सकती है, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालयों से कहा जा सकता है। केंद्र ने सुझाव दिया कि मामले को संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया जाए। हालांकि, पीठ ने पहले सभी राज्यों से वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगने का फैसला किया।
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पीठ ने कहा कि सभी राज्यों को उनके महाधिवक्ताओं द्वारा पत्र प्राप्त किए जाने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। यह जनहित याचिका 2016 से शीर्ष अदालत में लंबित है और इसमें बुजुर्गों के लिए कानूनी तथा संवैधानिक सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन का मुद्दा उठाया गया है।
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