होम›अपराध›पटना हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के आरोप को बदलकर आत्महत्या उकसाने की सजा दी
अपराध

पटना हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के आरोप को बदलकर आत्महत्या उकसाने की सजा दी

निचली अदालत की दहेज हत्या के तहत उम्रकैद की सजा को हटाकर कोर्ट ने इसे 'आत्महत्या के लिए उकसाने' का मामला माना। जांच में डॉक्टर की अनुपस्थिति और अभियोजन की चूकों को उजागर किया गया, जबकि शराब के नशे में हुए घरेलू विवाद को अपराध का प्रमुख कारण बताया गया। आरोपी को अब धारा 306 के तहत उसकी कटे हुए समय के बराबर सजा और 20,000 रुपये जुर्माना दिया गया।

5 अक्टूबर 2026 को 09:06 am बजे
पटना हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के आरोप को बदलकर आत्महत्या उकसाने की सजा दी

सौजन्य से:- ETV Bharat

पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदला, बेहद कड़ा निर्णय सुनाया

पटना उच्च न्यायालय ने आत्महत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. निचली अदालत के आदेश को पलट दिया. रिपोर्ट- आनंद वर्मा.

Published : October 5, 2026 at 1:09 PM IST

पटना : पटना हाईकोर्ट ने कटिहार जिले के मनसाही थाना क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित मामले में निचली अदालत के फैसले को बदलते हुए बेहद कड़ा निर्णय सुनाया है. निचली अदालत ने आरोपी पति धनंजय यादव को दहेज हत्या के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

'आत्महत्या के लिए उकसाने' का केस

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद एवं जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा ने सबूतों और परिस्थितियों के आधार पर इसे दहेज हत्या के बजाय 'आत्महत्या के लिए उकसाने' का मामला पाया और सजा को बदल दिया. कोर्ट ने पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की गंभीर चूकों को उजागर किया.

क्या है पूरा मामला?

उच्च न्यायालय ने कहा कि जब अस्पताल के बर्न वार्ड में पीड़िता का बयान (फर्दबयान) दर्ज किया जा रहा था, तब डॉक्टर का नामौजूद होना और बयान दर्ज करने वाले सब-इंस्पेक्टर को कोर्ट में गवाह के रूप में पेश न करना अभियोजन के केस की विश्वसनीयता को पूरी तरह से ध्वस्त करता है. बिना डॉक्टर की मौजूदगी के दर्ज बयान को डाईंग डिक्लेरेशन (मृत्युपूर्व कथन) के रूप में स्वीकार करना सुरक्षित नहीं है.

शराब से परेशान.. इसलिए उठाया खौफनाक कदम

कोर्ट ने शराबखोरी और घरेलू प्रताड़ना पर कड़ा रुख अपनाया. कोर्ट ने पाया कि घटना वाले दिन आरोपी पति अत्यधिक शराब पीकर घर आया था. पीड़िता द्वारा शराब पीने का विरोध करने पर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी बाहर चला गया और पीड़िता ने क्षुब्ध होकर खुद पर केरोसिन छिड़ककर आग लगा ली. कोर्ट ने माना कि लगातार शराब के नशे में प्रताड़ित करना और क्लेश पैदा करना महिला को इतना खौफनाक कदम उठाने के लिए मजबूर करने के समान है.

20,000 रुपये जुर्माना लगाया

कोर्ट ने पाया कि मामला दहेज के लिए सीधे तौर पर हत्या का नहीं बल्कि पारिवारिक कलह और शराब के नशे के कारण आत्महत्या का है. आरोपी धनंजय यादव पहले ही साढ़े नौ साल जेल में बिता चुका है. कोर्ट ने उसकी सजा को धारा 306 आईपीसी के तहत घटाकर उसके द्वारा अब तक काटी गई अवधि के बराबर कर दिया, साथ ही 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया.

ये भी पढ़ें :-

जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

'केवल चार्जशीट में नाम होने से अपराध साबित नहीं होता'..HC ने रद्द किया FIR और निचली अदालत का आदेश

32 साल की नौकरी के बाद भी नहीं मिली पेंशन, पटना हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
झांसी में पुलिस की अनदेखी, अदालत ने दर्ज की 50 से अधिक FIRs
अपराध

झांसी में पुलिस की अनदेखी, अदालत ने दर्ज की 50 से अधिक FIRs

रात 10 बजे भी महिला की सुरक्षा को कोर्ट ने बना दिया अनिवार्य, बलात्कारी में कानून का डर जरूरी
अपराध

रात 10 बजे भी महिला की सुरक्षा को कोर्ट ने बना दिया अनिवार्य, बलात्कारी में कानून का डर जरूरी

भाजपा ने पंजाब सरकार पर कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया
अपराध

भाजपा ने पंजाब सरकार पर कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म‑6 में अनधिकृत परिवर्तन को खारिज किया, सीईसी को निलंबित करने की मांग अस्वीकार
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म‑6 में अनधिकृत परिवर्तन को खारिज किया, सीईसी को निलंबित करने की मांग अस्वीकार

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी नई फॉर्म‑6 की मंजूरी, मुख्य न्यायाधीश ने किया खंडन
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी नई फॉर्म‑6 की मंजूरी, मुख्य न्यायाधीश ने किया खंडन

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया नया फ़ॉर्म‑6 का अनुमोदन, सीजेआई ने किया स्पष्टिकरण
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया नया फ़ॉर्म‑6 का अनुमोदन, सीजेआई ने किया स्पष्टिकरण

अल्लाहाबाद हाई कोर्ट का निर्णय: बीमा कंपनी के अपील पर मोटर दुर्घटना का मुआवजा बढ़ सकता है, भले ही पीड़ित पक्ष ने कोई विरोध या अपील न की हो
अपराध

अल्लाहाबाद हाई कोर्ट का निर्णय: बीमा कंपनी के अपील पर मोटर दुर्घटना का मुआवजा बढ़ सकता है, भले ही पीड़ित पक्ष ने कोई विरोध या अपील न की हो

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा के रद्द निर्णय के कारण संवैधानिक संदर्भ को समाप्त करने का फैसला किया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा के रद्द निर्णय के कारण संवैधानिक संदर्भ को समाप्त करने का फैसला किया

ताज़ा ख़बरें