कानून मंत्री की पत्नी के ट्रांसफर पर शिक्षकों का विरोध, क्या है विवाद का कारण?
तमिलनाडु के कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार की पत्नी को पल्लावरम के सरकारी सेकेंडरी स्कूल से ट्रिपलिकेन संस्थान में स्थानांतरित किया गया, जिससे शिक्षकों में असंतोष हुआ। कोर्ट के आदेश से सामान्य ट्रांसफर काउंसलिंग प्रक्रिया निलंबित होने के बावजूद यह नियुक्ति हुई, और शिक्षकों ने आरोप लगाया कि मंत्री की पत्नी को विशेष सुविधा मिली। पल्लावरम स्कूल में वैज्ञानिक शिक्षक के पद की दो महीने से रिक्ति, बढ़ती छात्र-शिक्षक अनुपात और कार्यभार की चिंताएं शिक्षकों को ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता और तुरंत नियुक्ति के लिए विद्यालय प्रशासन से अपील करने पर मजबूर कर रही हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
तमिलनाडु की सरकार में कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार की पत्नी का पल्लावरम के एक सरकारी सेकेंडरी स्कूल से ट्रिपलिकेन के एक संस्थान में तबादला हुआ है। इसके चलते स्थानीय शिक्षकों के बीच आलोचना शुरू हो गई है। क्योंकि कोर्ट के आदेशों के बाद आम तबादला काउंसलिंग प्रक्रिया रुकी हुई है।
चेन्नई: थलपति विजय की अगुवाई वाली टीवीके सरकार में कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार चर्चा में हैं। क्योंकि निर्मल कुमार की पत्नी का पल्लावरम के एक सरकारी सेकेंडरी स्कूल से ट्रिपलिकेन के एक संस्थान में तबादला होने से शिक्षकों के बीच आलोचना शुरू हो गई है। क्योंकि कोर्ट के आदेशों के बाद आम तबादला काउंसलिंग प्रक्रिया रुकी हुई है। दरअसल ट्रिपलिकेन के गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में ट्रांसफर होने से पहले वह पल्लावरम के मारैमलई अडिगल गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में साइंस टीचर के तौर पर काम कर रही थीं।
क्यों उठा विवाद?
दरअसल सरकारी प्राइमरी, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में टीचरों का ट्रांसफर आम तौर पर एजुकेशन मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (ईएमआईएस) पोर्टल पर होने वाली जनरल काउंसलिंग के जरिए किया जाता है। एकेडमिक ईयर के लिए काउंसलिंग जून में होनी थी, लेकिन कोर्ट के दखल के बाद इसे रोक दिया गया। इस माहौल में टीचरों ने सवाल उठाया है कि जब काउंसलिंग प्रोसेस रुका हुआ था, तब एक व्यक्ति का ट्रांसफर कैसे मंजूर हो गया।
शिक्षकों ने लगाया आरोप
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि टीचर को खास तरजीह दी गई हो सकती है। क्योंकि वह लॉ मिनिस्टर की पत्नी हैं। उन्होंने ट्रिपलिकेन स्कूल को चुनने का संबंध ग्रीनवेज रोड पर मिनिस्टर के सरकारी घर के पास होने से भी जोड़ा। इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि जगह की वजह से यह फैसला लिया गया। इस ट्रांसफर से पल्लावरम स्कूल में चिंता पैदा हो गई है। जहां साइंस टीचर का पद कथित तौर पर लगभग दो महीनों से खाली पड़ा है। कोई दूसरा टीचर नियुक्त नहीं किया गया है। इससे बाकी टीचरों को एक्स्ट्रा क्लास लेनी पड़ रही है और काम का बोझ बढ़ गया है।
स्टूडेंट-टीचर रेश्यो है चिंता
टीचरों का कहना है कि स्कूल में स्टूडेंट की संख्या काफी ज्यादा है और पहले से ही स्टूडेंट-टीचर रेश्यो को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लगातार खाली पद की वजह से टीचरों पर दबाव बढ़ गया है और क्लास के रेगुलर बंटवारे में दिक्कत आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कमी से पढ़ाने और स्टूडेंट की पढ़ाई की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है, खासकर अगर यह पद लंबे समय तक खाली रहता है। टीचरों को अब अपनी मौजूदा एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव जिम्मेदारियों के साथ-साथ एक्स्ट्रा क्लास भी आपस में बांटनी पड़ रही हैं।
स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट से अपील
उन्होंने स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट से अपील की है कि बिना और देरी किए किसी दूसरे टीचर को नियुक्त किया जाए ताकि स्टूडेंट की पढ़ाई पर असर न पड़े। उन्होंने ट्रांसफर और पोस्टिंग में ज्यादा पारदर्शिता की भी मांग की है, खासकर ऐसे समय में जब सैकड़ों टीचर जनरल काउंसलिंग के फिर से शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। इस घटना ने सरकार से यह बताने की मांग को फिर से तेज कर दिया है कि किन नियमों के तहत सस्पेंशन के दौरान ट्रांसफर की मंजूरी दी जा रही है और यह पक्का किया जाए कि सभी योग्य टीचरों पर एक जैसे नियम लागू हों। (इनपुट एजेंसी)
लेखक के बारे मेंसुजीत उपाध्यायसुजीत उपाध्याय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे अप्रैल-2020 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। सुजीत उपाध्याय NBT डिजिटल में अन्य राज्य डेस्क (पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और नॉर्थ ईस्ट के राज्य) में अहम सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन्होंने 15 साल से अधिक के पत्रकारिता करियर में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम को कवर किया है। वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 में यूपी टीम के लिए अहम जिम्मेदारी संभाली थी।
सुजीत उपाध्याय करियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ ही डेस्क पर काम करते आए हैं। अन्य राज्य डेस्क (पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और नॉर्थ ईस्ट के राज्य) में विधानसभा चुनावों के दौरान बड़ी जिम्मेदारी के साथ काम किया है।
पत्रकारिता अनुभव:
सुजीत उपाध्याय के पत्रकारिता करियर की शुरुआत हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार हिन्दुस्तान, देहरादून में सिंतबर 2010 में हुई। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण, देहरादून में फरवरी 2011 से मई 2012 तक काम किया। यहां उन्होंने सिटी और गढ़वाल डेस्क के साथ ही रिपोर्टिंग का महत्वपूर्ण अनुभव अर्जित किया। जून 2012 से मार्च 2013 के दौरान वह आज समाज, अंबाला से जुड़े रहे। यहां उन्होंने हरियाणा डेस्क के साथ चंडीगढ़ डेस्क पर काम किया। इसके बाद वह अप्रैल 2013 में हिन्दुस्तान, बरेली से जुड़े। यहां पर उन्होंने जनवरी 2018 तक काम किया। इतने समय तक प्रिंट मीडिया में काम करने के इन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया। फरवरी 2018 में वह जी मीडिया से जुड़े। यहां उन्होंने पहले जी न्यूज फिर इंडिया डॉट कॉम के लिए काम किया। इसके बाद अप्रैल 2020 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हैं।
विशेषज्ञता:
सुजीत उपाध्याय महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर,पंजाब-हरियाणा, हिमाचल समेत नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिणी राज्यों से जुड़े विषयों को कवर कर रहे हैं। इन राज्यों की राजनीति और क्राइम के अलावा करेंट अफेयर में इनकी पकड़ है।
शिक्षा:
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले सुजीत उपाध्याय ने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (VBS Purvanchal University), जौनपुर से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी(HNB Garhwal University), श्रीनगर से एमए इन मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।... और पढ़ें
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